Friday, October 30, 2009

एक गोत्र में प्यार और फिर शादी करने पर सजा-ए-मौत

एक बार फिर इंसानियत को बदनाम करते हुए एक गोत्र में प्यार और फिर शादी करने पर लड़की के घर वालों ने कपल्स को ऐसी सजा दी है कि सुनने वाले भी सिहर जाएं। मामला कहीं दूर का नहीं भारत की राजधानी के नरेला इलाके का है। प्रेमी जोड़े के घर से भागकर शादी करने के बाद लड़की के घरवालों ने बहाने से दोनों को वापस बुलाया। इसके बाद लड़के की हत्या कर दी और युवती को घर में बंधक बनाए रखकर कुछ रिश्तेदारों ने बलात्कार भी किया। किसी तरह लड़की अपने परिवार वालों के चंगुल से भागने में सफल रही और नरेला थाने में आकर इसकी खबर दी। इसके बाद सोनीपत की नहर से युवक की लाश निकालकर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। लड़की के पिता और नाबालिग भाई समेत पांच मुलजिमों को गिरफ्तार किया गया है।

सोनीपत के महारा गांव के रहने वाले वीरेंद्र सिंह (24) का प्रेम अपने ही गांव की लड़की (22) से था। समान गोत्र होने के कारण लड़की के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। 2006 में दोनों ने गांव से भागकर शादी कर ली। वीरेंद्र के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज करा दिया गया। लड़की के घरवालों ने दोनों को खोज लिया। वीरेंद्र को जेल भिजवाने के बाद लड़की की शादी जींद में जयपाल नामक शख्स से कर दी गई।

जयपाल वीरेंद्र से रिश्ते के बारे में अपनी पत्नी को अपशब्द कहने लगा। परेशान होकर लड़की ने वीरेंद्र से संपर्क किया। दोनों अपने घरों से एक बार फिर भागकर दिल्ली के समयपुर बादली में रहने लगे। उन्होंने चंडीगढ़ में शादी की और हरियाणा के समालखा में बस गए। लड़की के घरवाले दोनों की तलाश शिद्दत से कर रहे थे। उनके गांव के रहने वाले इंद्रजीत नामक व्यक्ति को उनके पते का सुराग मिल गया। उसने इन दोनों से संपर्क कर उन्हें दिवाली साथ मनाने के लिए कहा।

पति-पत्नी उसकी बातों में आ गए। इंद्रजीत ने उनसे नरेला में संदीप के घर आने के लिए कहा। संदीप लड़की के चाचा का पोता यानी भतीजा है। वीरेंद्र अपनी पत्नी के साथ संदीप के घर पहुंचा। वहां इंद्रजीत और संदीप मौजूद थे। उन्हें यह मालूम नहीं था कि कुछ देर बाद लड़की के परिवार के लोग भी वहां आने वाले हैं। करीब 10 बजे लड़की का पिता दया सिंह, लड़की का 17 साल का भाई और उनके गांव में रहने वाला पवन वहां आ गए।

लड़की को जबरन दूसरे कमरे में ले जाया गया। उससे अलग कमरे में वीरेंद्र के कपड़े उतारकर उसकी जबर्दस्त पिटाई शुरू की गई। लड़की के मुताबिक, उसके भतीजे संदीप और इंद्रजीत ने उससे रेप किया। बाद में वह साइड वाले कमरे में गई तो वहां उसने वीरेंद्र को बुरी तरह पिटते देखा। उसकी पिटाई रात 3 बजे तक चली। 3:30 बजे गला घोंटकर वीरेंद्र की हत्या कर दी गई।

रात में संदीप की मारुति वैन में लाश को सोनीपत में नरा गांव के पास नहर किनारे ले जाया गया। वहां वीरेंद्र के गले में प्लास्टिक की रस्सी डालने के बाद उसे पत्थर से बांधकर नहर में फेंक दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मुलजिमों का प्लान लड़की को भी कत्ल करना था। किसी तरह वह 22 अक्टूबर को उनके शिकंजे से भाग निकली। वह अपने किसी जानकार के पास नजफगढ़ गई। इसके बाद हिम्मत जुटाकर उसने नरेला आकर पुलिस को खबर दी।

स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर पूरण पंत और एसआई जसमोहिंदर चौधरी, दीपक मलिक आदि पुलिसकर्मियों ने नहर से वीरेंद्र की लाश निकाली। दया सिंह, संदीप, इंद्रजीत, पवन और लड़की के नाबालिग भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है। मारुति वैन भी जब्त कर ली गई।

यह सब देखकर हैरानी होती है कि हम अपने को इंसान कहते हैं। जिसके अंदर संवेदना होती है। हम तो जानवर से भी गए गुजरे हैं। वो भी अपने बच्‍चों की रक्षा करता है। हम तो जानवरों से भी गए गुजरे हैं। अपने ही बच्‍चों की खुशियों का गला घोंटकर उससे हमें खुशी मिलती है।

Monday, October 26, 2009

जलेबी या पान खिलाकर प्रेमिका को भगा ले जाओ

यूँ तो किसी को जलेबी या पान का बीड़ा खिलाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन यदि गौण्ड समाज का ठाठिया उत्सव हो तो समझ लीजिए कि पान और जलेबी की आड़ में एक प्रेम कहानी परवान चढ़ रही है।

दरअसल आदिवासियों और उनमें भी खासकर गौण्ड समाज में यदि कोई नौजवान किसी कन्या को पान का बीड़ा या जलेबी दे तो इसका मतलब है कि वह लड़की को अपना प्रणय प्रस्ताव भेज रहा है और अगर लड़की उसे खा ले तो समझ लेना चाहिए कि लड़की ने उस प्रणय निवेदन को स्वीकार कर लिया है। प्रेम की भाषा समझने के बाद लड़के को उस लड़की को भगा ले जाना होता है और फिर बज उठती है शहनाई।

एक बार भाग जाने के बाद ऐसे प्रेमी युगल को दोनों पक्षों के परिवारजनों की स्वीकृति मिलना लाजिमी होता है और फिर इन्हें अज्ञातवास से बुला कर इनके ब्याह की रस्म पूरी कर दी जाती है। इस तरह उलझी सी जलेबी उनके प्यार की उलझन सुलझाने का जरिया बन जाती है।

Thursday, October 22, 2009

मेरे पति को पापा और भैया ने मरवायाः आंचल

जम्मू-कश्मीर की ये कहानी दिल दहला देने वाली है। आंचल की आज एक ही ख्वाहिश है कि उसके पिता और भाई के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। आंचल का आरोप है कि पिता और भाई ने ही पुलिसवालों के साथ मिलकर उसके पति की हत्या की है।

श्रीनगर में रहने वाली आंचल ने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जम्मू के रजनीश से शादी की थी। आंचल की मानें तो उसका परिवार शुरू से ही रजनीश के पीछे पड़ा हुआ था इसलिए ये जोड़ा घर के बाहर ही रह रहा था। 30 सितंबर को आंचल अपने पति के साथ उसके घर जम्मू पहुंची और उसी समय पुलिस रजनीश और उसके भाई को उठा कर ले गई। 3 अक्टूबर को रजनीश की थाने के भीतर बेदर्दी से हत्‍या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक रजनीश ने खुदकुशी कर ली थी लेकिन आंचल का आरोप है कि रजनीश ने खुदकुशी नहीं की है बल्कि उसे मारा गया है।

रजनीश की मौत 3 अक्टूबर को हुई और 5 अक्टूबर को उसका शव जम्मू पहुंचा। इंसाफ की आस लगाते लगाते आखिरकार परिवार ने सात दिन बाद रजनीश का अंतिम संस्कार शनिवार को कर दिया लेकिन आंचल के आंसू सबसे यही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उसकी यही गलती थी कि उसने प्यार किया और अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की।

आंचल का पुराना नाम अमीना है जबकि उसके पति रजनीश कारोबार के सिलसिले में श्रीनगर जाते थे। वहीं दोनों के बीच प्यार हुआ। लेकिन आंचल के घऱवाले इस प्यार के खिलाफ थे। जैसे ही अमीना यानि आंचल ने शादी के लिए अपने घर, शहर और नाम छोड़ा उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। इस पूरी घटना के दौरान पुलिसवालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। रिश्तेदारों का आरोप है कि शुरू से ही पुलिसवालों ने न सिर्फ आंचल के घरवालों का साथ दिया बल्कि उन्होंने ही मिलकर हत्या की साजिश रची।

आंचल ने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ 21 अगस्त को ही आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली और उसी दिन उसके पिता ने श्रीनगर के एक थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवा दी। साथ ही ये बताया कि बेटी की उम्र 17 साल है। पुलिस ने अगवा करने के आरोप में रजनीश और उसके भाई को धर दबोचा। और दोनों भाई को श्रीनगर ले आई। यहीं थाने के भीतर 3 अक्टूबर को रजनीश एक फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौत की वजह खुदकुशी बताई हालांकि परिवार ने इससे साफ इनकार किया है।

वैसे इस मामले में रिश्तेदारों का आरोप बेवजह नहीं हैं।सवाल ये है कि आखिर थाने के भीतर ही कोई कैसे खुदकुशी कर सकता है? दस्तावेजों से साफ है कि आंचल की उम्र में 21 साल है, तो फिर पुलिस ने उसे नाबालिग क्यों मान लिया? जब आंचल ने साफ कर दिया कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है, उसके बावजूद पुलिस रजनीश और उसके भाई को उठा कर क्यों ले गई?

साभार: आईबीएन-7

Wednesday, October 21, 2009

दिल के कोने से एक आवाज आती है...

दिल के कोने से एक आवाज आती है,

हमें हर पल उनकी याद आती है,

दिल पूछता है बार-बार हमसे,

जिन्हे हम याद करते हैं क्या?

उन्हें भी हमारी याद आती है।

Tuesday, October 20, 2009

मोहब्बत का गम होता बहुत है

मोहब्बत का गम होता बहुत है,

के अब ये लफ्ज भी रूसवा बहुत है,

उदासी का सबब मैं क्या बताऊं,

गली-कूचो में सन्नाटा बहुत है,

ना मिलने की कसम खा के भी मैंने,

तुझे हर राह मैंने ढूंढा बहुत है,

ये आंखें क्या देखें किसी को,

इन आंखों ने तुझे देखा बहुत है,

ना जाने क्यूं बचा रखें हैं आंसू,

शायद मुझे रोना बहुत है,

तुझे मालूम तो होगा मेरे हमदम,

तुझे एक शख्स से चाहा बहुत है।

Friday, October 16, 2009

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ...


सभी दिल का दर्द पढने वालों को
दिल का दर्द की तरफ से
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ...

Saturday, October 10, 2009

सामाजिक मानसिक संक्रिणता का शिकार एक और प्रेमी-युगल

समझ नहीं आता की हम आज 21वीं सदी में जी रहे हैं। कहने को तो हमने बहुत तरक्‍की की है। हम बहुत मॉर्डन हो गए हैं। परन्‍तु सोच से हम आज भी पिछडे हुए हैं। एक लडके और एक लडकी का आपस में प्‍यार करना आज भी हमारे समाज में एक अपराध समझा जाता है। क्‍योंकि ऐसा करने से समाज में उनका सिर नीचा हो जाता है और किस समाज की बात करते हैं हम वो समाज जो कि मुसिबत पडने पर कभी सहायता के लिए आगे नहीं आता है हां पीछे खडा होकर तमाशा देखने और बातें बनाने के कुछ नहीं करता। जब तक हमारी सोच इसी तरह पीछडी रहेगी तब तक मोनिका-गौरव जैसे प्रेमी इस सामाजिक मान‍सिक संक्रिणता का शिकार होते रहेंगे।

मोनिका-गौरव केस में दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद साहिबाबाद पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी, आईओ सब-इंस्पेक्टर समेत 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। गौरव की तहरीर पर कानूनी धाराओं का उल्लंघन, आरोपियों को बचाने का प्रयास और गैरकानूनी ढंग से बंधक बनाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के बाद अब एसएसपी अखिल कुमार ने पूरे मामले की जांच एएसपी हैप्पी गुप्तन से लेकर एसपी सिटी राहुल यादवेंदु को सौंप दी है।

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के गौतमनगर निवासी गौरव ने 6 जुलाई को साहिबाबाद निस्तौली में रहने वाली मोनिका के साथ आर्यसमाज रीति से विवाह किया था। इधर, मोनिका के परिजनों ने गौरव के खिलाफ नाबालिग का अपहरण करने का मामला दर्ज कराया था। आरोप हैं कि 12 जुलाई को और दिल्ली पुलिस ने मोनिका और गौरव को दिल्ली से साहिबाबाद थाने लाई। मोनिका द्वारा खुद को बालिग बताने के बावजूद पुलिस ने बिना जांच किए गौरव को जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में मोनिका के कोर्ट में बयान देने के बाद उसे बेल मिल गई थी। मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचने पर कोर्ट ने 7 अक्टूबर को मोनिका को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिल्ली और साहिबाबाद पुलिस को दिए।

इधर 16 सितंबर को मोनिका की मौत होने के बारे में दिल्ली पुलिस को बता दिया। 7 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने साहिबाबाद पुलिस का पक्ष रखने गई एएसपी हैप्पी गुप्तन ने न केवल पुलिस की गलती स्वीकारी, बल्कि कोर्ट के समक्ष कहा था कि अब गौरव की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई होगी। इसके बाद गुरुवार गौरव ने साहिबाबाद थाने में तहरीर दी और देर रात को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। रिपोर्ट में साहिबाबाद के तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर योगेश पाठक, आईओ सब-इंस्पेक्टर नीरज गौतम, मोनिका के भाई, मां, बहनोई, 2 चाचा, और 2 चचेरे भाइयों को नामजद किया गया है।

साभार: नवभारत टाइम्‍स

Wednesday, July 22, 2009

"रात की खामोशी रास नहीं आती"


रात की खामोशी रास नहीं आती,
मेरी परछाई भी अब मेरे पास नहीं आती,

कुछ आती है तो बस तेरी याद,
जो आकर एक पल भी मुझसे दूर नहीं जाती

Friday, May 8, 2009

"फिर किसी याद ने रातभर है जगाया मुझको"



फिर किसी याद ने रातभर है जगाया मुझको,
क्या सजा दी है मोहब्बत ने खुदाया मुझको,

दिन को आराम है ना रात को है चैन कभी,
जाने किस खाक से कुदरत ने बनाया मुझको,


दुख तो ये है कि जमाने में मिले गैर सभी,
जो मिला है वो मिला पराया मुझको,


जब कोई भी ना रहा कांधा मेरे रोने को,
घर की दीवारों ने सीने से लगाया मुझको,


बेवफा जिंदगी ने जब छोड़ दिया है तनहा,
मौत ने प्यार से पहलू में बिठाया मुझको,

वो दीया हूं जो मोहब्बत ने जलाया था कभी,
गम की आंधी ने सुबह और शाम बुझाया मुझको,

कैसे भुलूंगा तेरे साथ गुजारे लम्हें,
याद आता रहा जुल्फों का ही साया मुझको।

Tuesday, May 5, 2009

"इजाजत दे दो..."


तुम मेरी जिंदगी का एक हसीन लम्हा हो,
फूलों से खुद को सजाने की इजाजत दे दो,


मैं कितना चाहता हूं किस तरह बताऊ तुम्हें,
मुझे ये आज बताने की इजाजत दे दो,


तुम्हारी रात सी जुल्फों में चांद सा चेहरा,
मुझे ये शाम सजाने की इजाजत दे दो,

मुझे कैद कर लो अपने इश्क में,
ये जान तुम पर लूटाने की इजाजत दे दो,


नहीं है शौक मुझे भूलने का मगर,
मुझे ये दुनिया भुलाने की इजाजत दे दो।

Saturday, May 2, 2009

"एक तेरा अहसास है"


एक तेरा अहसास है जो हर वक्त मेरे साथ है,
एक तेरी याद है जो दिन-रात मुझे तड़पाती है,

एक उम्मीद है तेरे आने की अपना तुझे बनाने की,
ना चैन है ना सुकुन है ये कैसा मेरा हाल है,


रातें हो गई हैं इतनी लम्बी जो काटे ना कटे,
ना भूख है ना प्यास है ना कोई आस है,


ना कोई पास है बस एक तेरा अहसास है,
जो हर वक्त मेरे साथ है।

Friday, May 1, 2009

"यूं ना मुझको देख"


यूं ना मुझको देख तेरा दिल पगला ना जाये,
मेरे आंसू से तेरा दामन जल ना जाये,


वो मुझ से फिर मिला है आज ख्वाबों में,
अ खुदा कहीं मेरी नींद खुल ना जाये,

पूछा ना कर सब के सामने मेरी कहानी,
कहीं तेरा नाम होठों से निकल ना जाये,

जी-भर कर देख लो हमको तुम सनम,
क्या पता फिर जिंदगी की शाम ढल ना जाये,


यूं ना मुझको देख तेरा दिल पगला ना जाये,
मेरे आंसू से तेरा दामन जल ना जाये।

Thursday, April 30, 2009

"अहसास हुआ है हमको"


अब जो बिछड़े हैं तो ये अहसास हुआ है हमको,
दर्द क्या होता है तन्हाई कैसी होती है,

चारो तरफ गुंजती रुसवाई किसे कहते हैं,
अब जो बिछड़े हैं तो ये अहसास हुआ है हमको,


कोई लम्हा हो तेरी याद में खो जाते हैं,
अब तो खुद को भी याद नहीं कर पाते हैं,

रात हो दिन हो तेरे प्यार में अश्क बहाते हैं,
दर्द क्या होता है तन्हाई किसे कहते हैं,


अब जो बिछड़े हैं तो ये अहसास हुआ है हमको,
यूं तो दुनिया की हर चीज हसीन होती है,

प्यार से बढ़कर मगर कुछ नहीं होती है,
रास्ता रोक के हर किसी से यही कहते हैं,


अब जो बिछड़े हैं तो ये अहसास हुआ है हमको,
दर्द क्या होता है तन्हाई कैसी होती है।

Wednesday, April 29, 2009

"दिल में क्यूं है"


ये दिल तुझे इतनी शिद्दत से चाहता क्यूं है,
हर सांस के साथ तेरा ही नाम आता क्यूं है,

तु कितना भी मुझसे सख्त ताल्लुक रख ले,
जिक्र फिर भी तेरा मेरी जबान पे आता क्यूं है,

यूं तो हैं कई फासलें तेरे मेरे बीच,
लगता फिर भी तु मुझको मेरी जान सा क्यूं है,

तेरी यादों में तड़पने की हो चुकी है आदत मेरी,
तेरे दूर होने का फिर भी अहसास मुझको रुलाता क्यूं है,

ये जानता हूं कि तु बहुत दूर है मुझसे,
मगर फिर भी एक आस तुझे पाने की इस दिल में क्यूं है।

Tuesday, April 28, 2009

"जरा इतना बता दो मुझको"


चाहों जो मेरी खताओं की सजा दो मुझको,
पर खता क्या है जरा इतना बता दो मुझको,


मैंने चाहा था तुम्हें अपनी जान से बढ़कर,
इन वफाओं के सिले ऐसी वफा दो मुझको,


भुलना तुझको मेरे लिए ना मुमकिन है,
जो हो सके तो सनम तुम ही भुला दो मुझको,


अब अगर सोच ही लिया है दूर होना है मुझसे,
मैं मर ही जाऊं कोई ऐसी सजा दो मुझको।

Monday, April 27, 2009

"मैं और मेरा दिल"


तनहा बैठे हैं दोनों मैं और मेरा दिल,

तेरी याद में रहते हैं दोनों मैं और मेरा दिल,

शिशे का वजूद और हर तरफ हाथ में पत्थर,

सहमें बैठे हैं दोनों मैं और मेरा दिल,

खामोशी का सबब जो कोई पुछ ले,

तेरा नाम ही लेते हैं दोनों मैं और मेरा दिल,

Saturday, April 25, 2009

"फिर भी ये मोहब्बत क्यूं है"


तेरी तस्वीर मेरी आंखों में बसी क्यूं है,
जहां देखों बस उधर तु ही क्यूं है,

तेरी यदों से वाबस्ता मेरी तकद्दीर है,
लेकिन तुझे ना पा कर मेरी तकद्दीर रूठी क्यूं है,


मुझ को है खबर आसान नहीं तुझे हासिल करना,
फिर भी ये इंतजार ये बेकरारी क्यूं है,

बरसों गुजर गए मेरे तन्हाइयों में लेकिन,
मेरी बाहों को आज भी तेरा इंतजार क्यूं है,

तेरी चाहत की कसम खून के आंसू रोया हूं,
अब नहीं है कुछ बाकी फिर ये जान बाकी क्यूं है,

खत्म हुआ मेरा ये अफसाना एक बात बताऊं,
अंजाम था मालूम मुझको फिर भी ये मोहब्बत क्यूं है।

Thursday, April 23, 2009

"एक तू तेरी आवाज याद आएगी"


एक तु तेरी आवाज याद आएगी,
तेरी कही हुई हर बात याद आएगी,

दिन ढल जाएगा रात याद आएगी,
हर लम्हा पहली मुलाकात याद आएगी,


कभी हंसती कभी रोती कभी मुस्कुराती,
ये जिन्दगी तेरे बिन यूं ही कट जाएगी,


पर कुछ कमी इसमें भी तो रह जाएगी,
दिल को तड़पाएगी कभी तरसाएगी,

हर लम्हा तेरी याद आ जाएगी,
एक तू तेरी आवाज याद आएगी...।

Wednesday, April 22, 2009

"मैं वो हूं जिसे तुम प्यार किया करते थे..."


मैं वो हूं जिसे तुम प्यार किया करते थे,
दिन मैं सौ बार नाम मेरा लिया करते थे,


आज क्या बात हुई क्यूं मुझसे खफा बैठे हो,
क्या किसी और के दिल को अपना बना बैठे हो,

फासले पहले तो इतने ना हुआ करते थे,
मैं वो हूं जिसे तुम प्यार किया करते थे,

माना के ये गम है कोई सौगात नहीं,
तुम हमें अपना कहो ऐसे भी हालात नहीं,

मैं वो हूं जिसे तुम प्यार किया करते थे,
जी में आता है कि आज तुम्हें तड़पा दूं,

दर्द जो तुमने दिया वो सब तुमको लौटा दूं,
अगर भूल गए हो तो ये बतला दूं,

तुम मुझे हासिल-ए-अरमान कहा करते थे,
मैं वो हूं जिसे तुम प्यार किया करते थे।

Tuesday, April 21, 2009

"कभी दिल में बसा दिया..."


कभी नजर से गिरा दिया, कभी दिल में बसा दिया,
मोहब्बत में तुमने हमें कभी हंसा तो कभी रूला दिया,

कभी प्यार बेशुमार किया कभी दर्द बेइंतिहा दिया,
अपनी दिवानगी में तुमने हमें किस मुकाम पर पहुंचा दिया,

दिल को खिलौना समझ कर तुमने, हमें हर खेल में हरा दिया,
कभी उम्मीदों को बढ़ा दिया, कभी मायूसियों ने जीना दुश्वार किया,

फिर भी हमदम हमने तुम्हें, प्यार की हद से भी ज्यादा प्यार किया।

Thursday, April 16, 2009

"जिंदगी गुजर रही है खुशी की तलाश में"


जिंदगी गुजर रही है खुशी की तलाश में,
रोते हुए दिल के लिए हंसी की तलाश में,

वक्त ने इस दिल को कई जख्म दिये,
इन जख्मों के लिए मरहम की तलाश में,

खामोशियां इस दिल का हिस्सा बन गई,
दो पल के लिए मुस्कुराहट की तलाश में,

अपनी मंजिल तक भूल चुका हूं,
उस के प्यार की तलाश में,

चाहतों की दुनिया में गम के सिवा कुछ नहीं,
पल-पल गुजर रहा हूं खुशी की तलाश में,

मेरे दिल इतना बता मुझे,
क्यूं तड़प रहा है तु उसी की तलाश में।

Wednesday, April 15, 2009

"तेरे प्यार का दीप..."


जल रहा है तेरे प्यार का दीप मेरे दिल में,
परवाह नहीं चाहे आज शमा जले ना जले,

मिल रही है रोशनी तेरे प्यार की रंगीनियों में,
परवाह नहीं चाहे आज उजाला रहे ना रहे,

हमें ढल जाने दो आज अपने अंग-अंग में,
डूब जाने दो आज हमें अपनी प्यासी निगाहों में,

मिलने दो आज खुशबू हम दोनों के तन-बदन को,
सुन लेने दो आज सारी दिल की धड़कन को जो धड़कती है तेरे लिए,

कैद करने दो आज तड़पती तन्हाईयों को अपने दिल में,
छप जाने दो आज अपनी तस्वीर को मेरी पलकों में,

तुम ही कह दो छुपाऊं कैसे ओ सनम आज तड़प में इस दिल की,
मेरे दिल की हर धड़कन में जब नाम तेरा ही रहता है।

Tuesday, April 14, 2009

"उसे जब याद आयेगा..."


उसे जब याद आयेगा वो पहली बार का मिलना,
तो पल-पल याद रखेगा ये सब कुछ भूल जाएगा,

उसे जब याद आयेगा वो मौसम का हर लम्हा,
तो खुद ही रो पड़ेगा या खुद ही मुस्कुराएगा,


उसे जब याद आयेगा सावन लौट आया है,
बुला भेजेगा वो मुझको या खुद ही लौट आयेगा,

उसे जब याद आयेगा मैं कैसे मुस्कुराता था,
तो आंखे मुस्कुराएंगी या दामन भीग जायेगा,

उसे जब याद आयेगा मैं कैसे नाम लेता था,
तो मेरा नाम लिखेगा या अपना भी मिटाएगा।

Monday, April 13, 2009

"क्यूं प्यार में ऐसा होता है?"


कि जिसे दिल चाहे उसे पर मर जाने को दिल चाहता है।
कि उस के आंसू पी जाने को दिल चाहता है।
कि उस के हर गम को मिटा देने को दिल चाहता है।
कि उसको हर पल मुस्कुराता हुआ देखने को दिल चाहता है।

कि उस पर जिंदगी लुटा देने को दिल चाहता है।
कि उसका हाथ पकड़कर उड़ जाने को दिल चाहता है।
कि उसकी आंखों में खो जाने को दिल चाहता है।
कि उसकी प्यारी-प्यारी बातों को हर पल सुनने को दिल चाहता है।

कि उसको हर खुशी देने को दिल चाहता है।
कि उसको हर आफत से महफूज रखने को दिल चाहता है।
कि उसके रास्ते में गिरे हुए हर कांटे को उठा देने को दिल चाहता है।
कि उसको दिल में छुपा लेने को दिल चाहता है।

कि उसको हर पल सपनो में रखने को दिल चाहता है।
कि उसकी परछाई को ही देख कर दिल खुश हो जाता है।
कि उसकी एक नजर से ही दिल को सुकुन हा जाता है।
कि उसका चेहरा चारो तरफ छा जाता है।

कि उसकी बात-बात पर प्यार आ जाता है।
कि उसकी बाहों में दिल मर जाना चाहता है।
कि उसके हाथों की लकीरों को बदल बदल देना चाहता है।
कि उसके नसीब में लिखा हुआ हर गम दिल अपने नाम कर लेना चाहता है।

कि उसकी हर ख्वाहिश को दिल पूरा कर देना चाहता है।
कि सारे जहान की खुशियां दिल उसके कदमों में बिछा देना चाहता है।

क्यूं प्यार में ऐसा होता है?
कि उस के साथ जीना तो क्या उसके साथ मर जाने को भी दिल चाहता है।
क्यूं प्यार में ऐसा होता है?

Saturday, April 11, 2009

अब तुम्हारी वफ़ा देखनी है


हाय जान कुछ दिनों से तुम्हारी याद इतनी बढ़ती जा रही है कि मैं बयां नहीं कर सकता। तुम्हारी आवाज सुनने को भी मेरे कान तरस रहे हैं। बहुत मुश्किल से अपने आप को सम्भाल रखा है। इसी उम्मीद में की एक ना एक दिन तुमसे जरूर मुलाकात होगी और तुम्हारा प्यारा से चेहरा मेरे सामने होगा। उस चेहरे को अपने हाथों से पकड़कर बस तुमको तकता रहूंगा। जब तक ये आंखे ना थक जाएं, जब तक ये दिल ना मान जाए कि तुम मेरे पास हो। जब तक ये सांसे चलते-चलते रुक ना जाएं। फिर दिल में एक डर भी लगता है कि कहीं तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी, कहीं तुम वक्त के साथ समझौता तो नहीं कर लोगी। क्योंकि जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन मेरी ये सांसे रूक जाएंगी दिल धकड़ना बंद कर देगा। क्योंकि तुमसे दूर रहकर भी मैं जिंदा इसीलिए हूं की तुम्हारे प्यार पर मुझे अटूट विश्वास है मुझे पता है कि तुम जिंदगी छोड़ सकती हो लेकिन मुझसे प्यार करना नहीं छोड़ सकती हो। मैं समझ सकता हूं कि मुझसे दूर रहकर तुम पर भी क्या बीतती होगी। किस तरह से तुम वहां अपना समय काटती होगी। किस तरह तुम उस नजरबंद की कैद में सांस लेती होगी।

मुझे तो पहले से ही तुम्हारी फैमली पर विश्वास नहीं था। लेकिन तुम्हारी ही जिद थी कि नहीं ये हमारी फीलिंग का समझेंगे और हमारी शादी जरूर करागें। लेकिन मैंने फिर भी तुम्हारे इस फैसले का पूरा साथ दिया। क्योंकि कहीं ना कहीं मुझे भी तुम्हारे इस विश्वास पर विश्वास था कि शायद हमारे प्यार को ये लोग समझ जाएं। लेकिन शायद इनके सीने में दिल नहीं पत्थर है। जिससे जाकर सिर्फ सिर फोड़ा जा सकता है ये नहीं समझाया जा सकता कि प्यार क्या होता है। प्यार में तड़पना क्या होता है, कितनी तड़प होती है इस प्यार में। क्योंकि जिसने कभी प्यार किया ही नहीं उसे प्यार का अहसास कैसे कराया जा सकता है। वे कहते हैं कि हमें तुझ से ज्यादा अपनी बेटी की फिक्र है। पर मुझे ये समझ नहीं आता कि ये कैसी फिक्र है कि उन्हें तुम्हारे आंसू भी दिखाई नहीं देते। तुम्हारे दिल का दर्द महसूस नहीं होता। ये कैसी फिक्र है उन्हें। मैं नहीं मानता कि उन्हें तुम्हारी या हमारे प्यार की कोई फिक्र है। उनके लिए तो सिर्फ अपनी झूठी और खोखली सामाजिक प्रतिष्ठा ज्यादा मायने रखती है। उन्हें तुम्हारी फिक्र नहीं सिर्फ अपनी उस झुठी सामाजिक प्रतिष्ठा की फिक्र है।

पर जान मुझे उनसे कोई मतलब नहीं क्योंकि मैं जनता हूं की वे ऐसे ही हैं और ऐसे ही रहेंगे। मुझे सिर्फ तुमसे मतलब है। तुम क्या चाहती हो मुझे या फिर तुम भी अपने परिवार की उस झुठी सामाजिक प्रतिष्ठा के आगे झुक जाओगी। जैसे पहले एक बार झुक गई थी। तुम्हारा जैसा फैसला होगा मुझे वो मंजूर होगा। अब पता नहीं तुमसे कब बात होगी। मैं तुमको बहुत मिस करता हूं। और मैं जनता हूं कि तुम भी मुझे बहुत मिस करती होगी। सच जान जब तुम्हारी याद बर्दाश्त नहीं हुई तब ये सब कुछ लिखा। तुमको बहुत प्यार करता हूं। और जब तक इस शरीर में जान है तब तक तुमको प्यार करता रहूंगा। तुमसे वफा की है और इस वफा को अंत तक निभाऊंगा अब सिर्फ तुम्हारी वफा देखनी है। आई लव यू

Wednesday, April 8, 2009

"वो बात करके देखें"


हम एक दूसरे के नाम कर के देखें,

जो रह गई थी दिल में, जो तुम को थी बतानी,

फिर मिले ना मिले मौका, वो बात करके देखें,

ये बातों ही बातों में, वो बात भी हो जाए,

जिस बात में वो बात हो, वो बात करके देखें।

Tuesday, April 7, 2009

"तेरी चाहत में..."


तेरी चाहत में हद से गुजर जाऊंगा एक दिन,
प्यार होता है क्या ये दिखाऊंगा एक दिन,

तेरी संगदिली को सहते-सहते,
मैं अपनी जान से जाऊंगा एक दिन,

अपनी चाहते सारी तुझपे वार के,
प्यार करना तुझे भी सिखाऊंगा एक दिन,

जी ना पाएगी तु भी हो के जुदा मुझसे,
ऐसा प्यार तुझ से कर जाऊंगा एक दिन,

अंधेरो में ढूंढ़ती रह जाएगी मुझको,
ऐसी बेरूखी दिखलाऊंगा एक दिन,

खो कर मुझ को बहुत पछताएगी सनम तु,
वफा ऐसी तुझ से कर जाऊंगा एक दिन,

ऐसी दिवानगी से चाहूंगा तुझको,
भूल जाओगी तुम भी सारा जहान एक दिन,

जान तेरी भी लबों पर आ जाएगी,
बन के खाक जब मैं मिट्टी में मिल जाऊंगा एक दिन।

Monday, April 6, 2009

"मुझे खोने से डरती थी..."


मेरी आंखों पे मरता था,
मेरी बातों पे हंसता था,

ना जाने शख्स था कैसा,
मुझे खोने से डरता था,

मुझे जब भी वो मिलता था,
यही हर बार कहता था,

सुनो!!

अगर मैं भूल जाऊं तो?
अगर मैं रूठ जाऊं तो?

कभी वापिस ना आऊं तो?
भूला पाओगी ये सब कुछ?

यूं ही हंसती रहोगी क्या?
यूं ही सजती रहोगी क्या?

यही बातें हैं अब उसकी,
यही यादें हैं अब उसकी,

मुझे बस याद है इतना,
मुझे वो प्यार करती थी,

मुझे खोने से डरती थी।

Saturday, April 4, 2009

कुछ इस तरह...

"मेरी जिंदगी है तु"


गम है या खुशी है तु,
मेरी जिंदगी है तु,


मुसीबतों के दौर में,
चैन की घड़ी है तु,

मेरी रात का चिराग,
मेरी नींद भी है तु,

मैं खिजा की शाम हूं,
रूत बहार की है तु,

मेरी सारी उम्र में,
एक ही कमी है तु,

मैं तो वो नहीं रहा,
हां! मगर वो ही है तु...।