Wednesday, December 31, 2008

"आज सिर्फ तुम्हारा इंतजार"

'हाय जान' कल का दिन तो सिर्फ इस इंतजार में निकाल दिया कि आज तुम फोन जरूर करोगी। और मैं तुम्हारी प्यारी आवाज सुनुंगा। अब तक तुम्हारा फोन आ जाता था। पर अब लगता है कि आज भी तुम फोन नहीं करोगी। जान आज तो 31 दिसम्बर है। कम से कम आज तो तुमको फोन जरूर करना चाहिए था। आज रात 12 बजे के बाद ये साल भी खत्म हो जाएगा। और सिर्फ रह जाएंगी इस साल की कुछ खट्टी-मिठी यादें। मैं चाहता था कि आज तुमसे बात करके इस साल की सारी यादें ताजा करूं। जान पर मुझे पूरा भरोसा है कि आज तुम कैसे भी करके मुझसे बात जरूर करोगी। या कोई मैसेज जरूर करोगी। जान मैं बेसर्बी से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। प्लीज आज मेरे विश्वास को बचा लेना। जान तुम्हारी बहुत याद आ रही है। तुमको बहुत मिस कर रहा हूं। जान मैं आज पूरा दिन तुम्हारा इंतजार करूंगा। शायद तुमको भी मेरी याद आ जाए। तो हमें याद कर लेना हम तो सिर्फ तुम्हारे ही इंतजार में आंखे बिछाए बैठे हैं तुम्हारे सिवा और कौन है हमारा जिसके लिए हमारा दिल धड़कता है, सांसे चलती हैं और हर पल सिर्फ अपनी जान से मिलने को तड़पती हैं, कहती हैं मुझसे ले चल हमें हमारी जिंदगी के पास और कहीं अब हमारा दिल ही नहीं लगता है। अब कैसे समझाऊ इन्हें की उधर मेरी जान का भी तो यही हाल होगा। वो भी जरूर किसी मजबूरी में फंसी होगी।

जान जब भी वक्त मिले तो आज फोन जरूर करना। मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। मैं आज तुमको Happy New Year कहना चाहता हूं। 'जान' 'आई लव यू'। पता नहीं क्यूं ऐसा होता है:-

जब कोई प्यार करने वाला कुछ पलों के लिए आपसे बातें न करे।
ना जाने बिन बताए कितने सवाल हो जाते हैं खडे।

फिर भी दिल में प्यार होता है भरा।
नफरत की ना होती कोई जगह।
बस गुजारिश होती है उनसे दे जाएं, अपने होने का अहसास इस दिल में।
ना जाने मोहब्बत क्या चिज होती है, समझ ना सका कोई इसे सारे जहां में।

अगर एक पल के लिए बातें ना हो उनसे।
तो डर ये रहता है कि कब होगी उनसे बात।
उसकी आवाज सुनकर दिल को मिलती है राहत।
उससे बड़ा सुकून और कुछ नहीं इस जहां में।
सोचता हूं क्यों प्यार करने वालो की जिंदगी दर्द से भरी इतनी लम्बी होती है।
गुजारिश है रब से किसी प्यार करने वाले को न दे ऐसी सजा।

Tuesday, December 30, 2008

"आंखें तेरे दीदार को तरसती हैं"

'जान' सोच रहा था कि तुम आज भी फोन करोगी पर अभी तक तो नहीं आया। मुझे पता है कि तुम्हारी भी मजबूरी है। और ये भी पता है कि तुम भी मुझको 'मिस' कर रही होगी। पर पता नहीं इस दिल को आजकल क्या हो गया है। तुम एक दिन भी फोन नहीं करती हो तो इसके अंदर जाने कैसे-कैसे विचार आने लगते हैं। कहीं तुम मुझे भूल तो नहीं गई। कहीं तुम किसी मुसीबत में तो नहीं हो। हर समय ऐसे ही विचार इस दिल के अंदर आते रहते हैं। मुझे हर पल तुम्हारी ही फिक्र रहती है। कहीं तुम मुझसे दूर ना हो जाओ। कहीं मैं तुमको खो ना दूं। हर वक्त तुम्हारी यादों को अपने इस दिल में सम्भाल कर रखता हूं, कि कहीं किसी की नजर ना लग जाए। बस तुमसे एक ही आशा रखता हूं कि प्लीज तुम मुझे बीच मझधार में छोड़कर मत जाना। हमेशा मेरा साथ देना। मैं अपनी ये जिन्दगी तुम्हारे साथ जीना चाहता हूं। तुम्हारे साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलना चाहता हूं। तुम्हें अपने जीवनभर का साथी बनाना चाहता हूं। अपनी सारी खुशियां और गम तुम्हारे साथ मिलकर बांटना चाहता हूं। तुम अगर रूठ हो जाओं तो तुमको प्यार से मनाना चाहता हूं। और चाहता हूं कि अगर कभी मैं भी रूठ जाऊं तो तुम मुझे मनाओं। 'जान' इस दिल अक्सर ऐसे ही भाव उठते हैं और कहते हैं-

खामोशियां तेरी मुझसे बात करती हैं,
मेरी हर आह हर दर्द समझती हैं,
पता है मजबूर है तू भी और मैं भी,
फिर भी आंखें तेरे दीदार को तरसती हैं।

जान पता है जबसे ये दूरियां हमारे बीच में आई हैं तब से मैं चैन से सो नहीं पाया हूं। हर पल तुम्हें ही याद किया है। काश! तुम्हें अपना दिल चीर कर दिखा सकता तो दिखाता कि इस दिल में सिर्फ तू ही तू बसी है।

'जान' अपना ख्याल रखना। हो सके तो बीच-बीच में हमें भी याद करना। 'आई लव यू' जान 'आई मिस यू'।

Monday, December 29, 2008

"भगवान ये विश्वास बनाए रखना"

आज दिल कुछ खुश लग रहा है। आज उससे बात की है। आज उसकी बातों से लगा कि वो अभी भी मुझसे सचमुच प्यार करती है। पिछले दो दिन बड़े बेचैनी भरे थे। कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। ऐसा लग रहा था कि शायद अब उसको हमेशा के लिए खोना पड़ेगा। इस ख्याल से ही दिल में और पेट में एक अजीब सा दर्द उठ रहा था। दो दिन तक इन्हीं सवालों पर सोचता रहा कि सोमवार को उससे क्या बोलूंगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि वो सचमुच मुझसे पीछा छुडाना चाहती है तो फिर मैं क्यों उसके रास्ते का रोड़ा बना हुआ हूं। मुझे कोई हक नहीं है कि मैं उसकी जिंदगी में दखलअंदाजी करूं। क्योंकि मैंने उससे प्यार किया है। पर शायद वो उस प्यार को ठीक से समझ नहीं पाई। इसलिए शायद मुझे उसकी जिंदगी से निकल जाना चाहिए। यही सब बातें सोचकर मैंने एक निश्चय किया कि सोमवार को उसको इन सब बंधनों से हमेशा के लिए आजाद कर दूंगा। क्योंकि वो भी यही चाहती है पर शायद वो अपने मुंह से कभी नहीं बोलेगी। उसकी कुछ बातों से मैंने ये नतीजा लगाया। एक बार जब उसने मुझसे ये कहा था कि मैं तुमको आजाद करती हूं, तुम कहीं भी शादी कर सकते हो। मैं तुमको लटकाना नहीं चाहती। मेरी तरफ से तुम आजाद हो। दूसरा उसने ये बोला था कि उसकी मम्मी ने ये कहा है कि हम सिर्फ अपनी कास्ट टाईटल वाले को ही एक्सप्ट करेंगे। और तीसरा उसने कुछ बातें मुझसे छुपाने की कोशिश की। तो आज मैं भी उसको यही बोलने वाला था कि 'जान' मैं भी तुमको आजाद करता हूं। हमेशा के लिए।

खैर आज का दिन मेरे लिए बहुत मुश्किल होने वाला था। मुझे अपने पर विश्वास नहीं हो रहा था कि क्या आज मैं उसको ये सब बोल भी पाउंगा या नहीं। इसलिए सुबह जल्दी उठ गया क्योंकि सोए हुए तो एक जमाना हो गया है अब तो लगता है नींद तभी आएगी जब हमेशा के लिए मौत की गोद में सो जाएंगे। उठ कर के भगवान का नाम लिया। नहा-धोकर के अपनी रोज की तरह पुजा-पाठ की और आज सोमवार था। और हर सोमवार को मंदिर भी जाता हूं सो मंदिर भी गया। पर वहां पर भी उसका मोह नहीं छुटा वहां जाकर भी हमेशा जो मांगता हूं वही मांगा कि भगवान उसे किसी तरह मेरे प्यार का विश्वास दिला दो। मेरी 'जान' को मुझे वापिस लौटा दो। मंदिर के सभी देवी-देवताओं पर अपना माथा टेका और सबसे अपने प्यार को वापिस पाने की प्रार्थना की। फिर घर आकर नाश्ता किया और घर से निकल गया। ऑफिस पहुंचकर शांति से बैठ गया और उसके फोन का वेट किया।

10.20 मिनट पर फोन वाईबरेट हुआ। मुझे पता था कि फोन उसी का है। मेरे दिल की धड़कने तेज हो गई। मैंने फोन उठाया और पिक किया। पर कुछ बोला नहीं। उसने वहां से 'हाय' कहा। मैंने भी 'हाय' कहा। फिर उसने पूछा कि 'गुस्सा हो'। मैंने कहा नहीं मैं गुस्सा नहीं हूं। और वैसे भी मेरे गुस्सा होने या न होने से किसी पर फर्क भी क्या पड़ता है। उसने कहा 'फर्क पड़ता है'। मैंने कहा नहीं किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर उसने कहा 'जान' I am sorry मैंने कहा तुम Sorry क्यों बोल रही हो वो तो मुझे बोलना चाहिए शायद मैं तुम पर अपना कुछ ज्यादा ही हक जता रहा था। और अपनी हद भूल गया था। उसने फिर से कहा I am sorry मैं सचमुच उस दिन भूल गई थी तुमको बताना। तुम प्लीज ऐसे मत बोलो। मुझे पता है कि तुम गुस्से में हो। अब प्लीज अपना गुस्सा छोड़ तो और मुझे माफ कर दो। मैं तुमसे Sorry बोल रही हूं। और हां तुमको एक बात और बतानी थी कि मैंने पापा से अपना मोबाइल मांग लिया है। और शायद मुझे एक-दो दिन में मिल जाएगा। पर नम्बर शायद दूसरा मिलेगा। वो मैं तुमको बता दूंगी। फिर मैंने उसको मुबारक बात दी। और कहा कि चलो अच्छा है अब तुम अपना कैरियर बनाना। उसने कहा तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो। तुमको खुशी नहीं हुई। मैंने कहा मैं खुश हूं। वैसे मुझे भी तुमको एक 'गुड न्यूज' देनी थी। उसने पूछा वो क्या। मैंने कहा हां तुम्हारे लिए तो गुड न्यूज है पर मेरे लिए थोड़ी 'बैड' है। उसने फिर से पूछा कि क्या न्यूज है। मैंने उसको बोला कि मैं अपना नम्बर बंद कर रहा हूं। उसने कहा क्यों दूसरा नम्बर ले रहे हों। मैंने कहा अब मैं अपने पास कोई फोन नहीं रखूंगा। ये सुनते ही उसकी आवाज धीमी हो गई। उसने कहा तुम ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ। मैंने कहा क्यों तुम भी तो ये ही चाहती थी। उसने कहा नहीं मैं ये नहीं चाहती। और फिर वो रोने लगी। उसने कहा मैं तुमको चाहती हूं। तुम ऐसा मेरे साथ क्यों कर रहे हो। तुमसे बात करने के बाद मुझे खुशी मिलती है। उसने रोते हुए मुझसे कहा 'आई लव यू'। मैंने भी उसको 'आई लव यू' कहा और अब मेरी भी आंखों में आंसू आ गए। मैंने उसको बोला कि 'जान' तुमसे एक बात बोलना चाहता हूं। उसने कहा क्या मैंने कहा 'जान' आई लव यू मैं तुमसे आज भी बहुत प्यार करता हूं। और तुम विश्वास नहीं कर सकती कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। उसने कहा मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं। प्लीज तुम मुझे माफ कर दो। मैंने कहा जान नहीं अब मैं और तुम्हारी लाईफ में इंटरफेयर नहीं करना चाहता। उसने कहा 'जान' मैं भी तुमसे दूर नहीं होना चाहती। तुम चाहते हो और इसलिए तुम ही मुझसे पीछा छुडाना चाहते हो। मैंने कहा मैं ऐसा नहीं चाहता तुम चाहती हो इसलिए मैं ये कर रहा हूं। क्योंकि अब तुमको मुझ पर ट्रस्ट नहीं रहा। अब तुम मुझपर विश्वास नहीं करती। उसने कहा ऐसा नहीं है मैं अभी भी तुम पर ट्रस्ट करती हूं। तुम प्लीज मुझसे बात करना बंद मत करो। मैंने कुछ देर तक सोचा और उससे कहा ठीक है मैं तुम्हारी बात पर यकीन करता हूं। पर तुम मेरी कसम खाकर कहो की मुझे कभी धोखा नहीं दोगी। मुझसे कभी चिटिंग नहीं करोगी। और मुझसे ही शादी करोगी। उसने कहा हां मैं अपनी कसम खाकर कर कहती हूं कि मैं तुमको धोखा नहीं दूंगी। मैंने कहा अपनी नहीं मेरी कसम खाकर कहो। उसने कहा ठीक है तुम्हारी कसम मैं तुमको धोखा नहीं दूंगी तुमसे ही शादी करूंगी। पर तुम पहले ये बोलो कि अब तुम मुझसे गुस्सा नहीं हो और अपना नम्बर बंद नहीं करोगे और मुझसे बात करना नहीं छोड़ोगे। मैंने कहा हां अब मैं गुस्सा नहीं हूं, पर मेरे विश्वास को कभी मत तोड़ना जिस दिन मुझे लगा कि तुमने मेरा साथ छोड़ दिया है या मुझ धोखा दिया है वो दिन मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होगा। उसने कहा ऐसा मत बोलो। मैंने कहा मैं सच बोल रहा हूं। उसने कहा मैं ऐसा नहीं होने दूंगी।

फिर मैंने उसको अपनी पिछली दो पोस्ट पढ़ कर सुनाई उसने कहा तुमने लिखी हैं मैंने कहा हां तुमने कसम जो दी थी। उसने कहा और आज लिखोगे मैंने कहा तुम बोला उसने कहा हां जरूर लिखना तुमने जो भी लिखा है अच्छा लिखा है। पर अब तो तुम मुझसे नाराज नहीं हो ना। मैंने कहा नहीं अब नहीं हूं, पर तुम मुझे धोखा मत देना। उसने कहा नहीं दूंगी, नहीं दूंगी, नहीं दूंगी। फिर उसने कहा चलो अब मैं चलती हूं। मैंने कहा ठीक है। अपना ख्याल रखना। आज मेडीसन ली। उसने कहा नहीं आज भी भूल गई। मैंने उसको फिर से डांटा कि प्लीज अपना ख्याल रखा करो। अपनी मेडीसन टाईम पर लिया करो। उसने कहा ठीक है। फिर दोनों ने एक दूसरे को 'किस' किया और 'आई लव यू' बोल कर फोन रख दिया।

Saturday, December 27, 2008

"'जान' तुझपे विश्वास करूंगा"

कल से दुविधा में हूं, कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं जितना उस पर विश्वास रखने की कोशिश करता हूं। उतना उस पर से विश्वास कम होता जाता है। हर बार वो कुछ न कुछ ऐसा कर देती है, जिससे की मुझे सोचने पर मजबूर हो जाना पड़ता है कि जो ये कह रही है वो सच है कि झुठ। क्या अब वो मुझ पर ट्रस्ट नहीं करती? क्या अब उसको मुझ पर बिल्कुल भी यकीन नहीं रहा। प्यार का आधार ही विश्वास होता है। अगर उसका विश्वास मुझपर से उठ गया है तो इसका मतलब शायद वो मुझे प्यार भी नहीं करती है। पर मुझसे सच भी नहीं बोलती है। हर बार यही कहती है कि 'जान' मैं तुमसे अभी भी प्यार करती हूं। मुझे तुमपर पूरा ट्रस्ट है। पर ये ऐसी पहेली बन गई है कि मैं इसको जितना सुलझाने की कोशिश करता हूं, उतना ही इसमें उलझ जाता हूं। कल एक मित्र ने सलाह दी कि तुम्हारी आत्मा से ज्यादा उसको और तुमको कोई प्यार नहीं करता तो तुम अकेले में चिंतन करो। तो कल पूरा दिन और रात इस बात पर चिंतन किया सोचा कि क्या करूं। वैसे कल घर जाकर उसने भी दो मैसेज दिए। उसने लिखा कि-
'' 'जान' प्लीज मुझे गलत मत समझो मैं ...............तुम हैल्प नहीं करोगे तो कौन करेगा। 'जान' मैं बताती पर याद नहीं रहा। मैंने कुछ जान के नहीं किया Sorry प्लीज गुस्से में तुमने फोन भी काट दिया। प्लीज गुस्सा मत होना। कॉल यू ऑन मन्डे। 'आई लव यू'। 'आई ट्रस्ट यू'।''

और दूसरे मैसेज में लिखा कि-
'' 'जान' प्लीज गुस्सा मत हो मुझे तुमपे पूरा विश्वास है। सुबह से तुम्हारे बारे में सोच रही हूं, तुम्हें मिस कर रही हूं। 'आई लव यू' Sorry फॉर दट' पर जान मुझे सच्ची में याद नहीं रहा बताना Sorry Again 'आई लव यू'।''

उसका मैसेज पढ़कर मुझे उस पर विश्वास करने का मन कर रहा है। हो सकता है वो सच कह रही हो। खैर अगर वो झुठ भी कह रही है तो भी मैं उस पर विश्वास करूंगा। मैं देखना चाहता हूं कि मेरा प्यार जीतता है या फिर कि उसका झुठ। मुझे मेरे प्यार पर पूरा विश्वास है।

हम तो अपने प्यार के विश्वास पर आगे बढेग़ें। बाकी जैसी भगवान की मर्जी। मैं उसको ये बताना चाहता हूं कि मेरा प्यार ओस की वो बूंद नहीं है जो कि सूरज की कुछ किरणे पड़ने से पिघल कर बह जाए। और मैं ये भी देखना चाहता हूं कि प्यार में फना होना कैसा लगता है। इस प्यार में या तो हम पूरे सफल होंगे या तो पूरे फना

जान मैं तुम पर पूरा विश्वास करूंगा। तुम चाहे मुझ पर विश्वास करो या न करो। क्योंकि हम उन प्यार करने वालों में से हैं। जो एक बार जीते हैं और एक बार ही मरते हैं और प्यार भी एक बार ही करते हैं। इस दिल के अंदर सिर्फ तुम्हारी ही तस्वीर बसी है। जिसकी हम रोज पूजा करते हैं। और हर वक्त हमारी जबान बर एक ही नाम होता है। और वो नाम है मेरी 'जान' का। 'आई लव यू' 'जान' 'आई लव यू'

Friday, December 26, 2008

"क्या मेरे प्यार की हार होगी"

आज कुछ लिखने का मन नहीं कर रहा है। पर फिर भी उसने अपनी कसम दी है कि तुम लिखना नहीं छोड़ोगे, तो इसलिए लिखना मेरी मजबूरी है। क्योंकि मेरे वजह से उसे कुछ हो ये इल्जाम हम अपने पर नहीं ले सकते। मुझे पता है कि वो मुझ पर विश्वास नहीं करती पर फिर भी पता नहीं क्यों सच भी नहीं बोलती। उन्हें तो हमारी कोई परवाह नहीं है पर फिर भी न जाने क्यों हमें उनकी परवाह करना अच्छा लगता है। हम तो अपना प्यार उसे सौ बार जताते हैं, पर वो है कि उसे हमारी कोई परवाह नहीं। जब बोलो तो कहती है कि अगर तुम्हारी परवाह नहीं होती तो तुमसे बात करने क्यों आती। मैं भी यही जानना चाहता हूं कि जब परवाह नहीं है तो फिर क्या मजबूरी है कि तुम मुझसे बात करने आती हो। शायद उसे ये लगता हो कि कहीं मैं उसकी लाईफ में कोई प्रोब्लम क्रिएट न कर दूं। हां शायद मुझे तो यही लगता है। पर मैं उसे ये बताना चाहता हूं कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।

हमारी तो मजबूरी ये है कि हम दिल से मजबूर हैं कमब्ख्त ये ईश्क जो कर लिया है। किसी ने सच ही कहा कि ईश्क आग का दरिया है, और तैर के जाना है। पर हमारी तो मजबूरी ये है कि हमें तैरना ही नहीं आता इसलिए शायद इस आग के दरिया में हमको तो सिर्फ ढूबते जाना है। क्योंकि अगर तैरना आ भी गया तो ये ही नहीं पता कि जाना कहा हैं। कौन है जो हमारा इंतजार कर रहा है। कौन है जो वहां पहुचने पर हमें अपने गले से लगाएगा। कौन है जो ये पूछेगा कि 'जान' तुम ठीक तो हो ना, कहीं कोई दर्द तो नहीं है, लाओ मैं अपने हाथों से उस पर दवा लगा दूं। कौन है जो ये कहे कि 'जान' कितनी देर लगा दी मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी।

आज 10.17 पर उसका फोन आया। मैंने कहा 'हाय' पर शायद उसे सुनाई नहीं दिया। मैंने फिर से 'हाय' कहा। उसने भी 'हाय' कहा। फिर मैंने 'आई लव यू' कहा। उसने भी 'आई लव यू' कहा। मैंने उससे पूछा तुम कैसी हो? उसने कहा मैं ठीक हूं तुम कैसे हो? मैंने कहा वैसा ही हूं। फिर उसने मुझसे पूछा कि 'क्रिसमस' कैसे मनाया। मैंने कहा पूरे दिन तुम्हारे मैसेज का वेट करता रहा। उसने कहा मैसेज का। फिर मैंने कहा तुमने कैसे मनाया। उसने कहा हां हमने तो.... ''पापा ने होटल में एक पार्टी रखी थी।'' बस पूरा दिन वहीं निकल गया। फिर मैंने कहा चलो इंज्योय किया ना। उसने कहा नहीं मजा नहीं आया मैंने पूछा क्यों? उसने कहा तुम जो नहीं थे वहां पर। उसने कहा मैं यही सोच रही थी कि काश तुम भी वहां पर होते तो कितना अच्छा होता। मैंने उससे कल कुछ पूछने के लिए कहा था वो मैं यहां लिखना नहीं चाहता। तो मैंने उससे उसका जवाब मांगा। उसने हमेशा की तरह इस बार भी मुझे मायूस किया। और कुछ बातें छुपाने की कोशिश की जो कि मुझे पता थी। जब मैंने उससे वो बात बताई तो उसने कहा हां मैं तुमको बताने ही वाली थी। पर बातें करते-करते ध्यान नहीं रहा। और मैं तो तुम्हारी पोस्ट सुन रही थी। जो तुम मुझे पढ़कर सुना रहे थे।

मैंने उससे कहा 'जान' मैं तुमको शुरू से ही हिंट दे रहा हूं पर तुम हो की तुमने मुझे वो बात नहीं बताई। अब मेरे कहने के बाद बता रही हो। ये बात तुम मुझे पहले भी तो बता सकती थी। इसका मतलब मैं समझ गया कि तुमको मुझपर ट्रस्ट नहीं है। तो 'ओके' फाइन मैं अब तुमसे कभी कुछ नहीं पुछूंगा। अब तुम जो करना चाहती हो करो मैं तुम्हारे किसी मैटर में कोई इंटरफेयर नहीं करूंगा। तुमने आज मुझे अपनी लाईफ में मेरी क्या जगह है वो बता दी। अब मैं तुमसे कभी कुछ नहीं पुछूंगा। और न ही कुछ लिखूंगा। लिखता इसलिए था कि जी सकूं। अगर नहीं लिखता तो शायद अब तक मर गया होता। लिखने से मन को सुकून मिलता था। बेचैनी कम हो जाती थी। लेकिन अब मुझे पता चल गया है कि जिसके लिए लिखता था। उसे मेरी कोई परवाह नहीं है। तो इसलिए अब लिखना भी बंद कर दूंगा। उसने कहा प्लीज तुम मुझे गलत मत समझों मैं तुमको सब कुछ बताना चाहती थी पर मौका नहीं मिला। और मैं अभी भी तुमसे प्यार करती हूं। और तुमको मेरी कसम है तुम लिखना बंद नहीं करोगे। और मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कल भी था और आज भी है और हमेशा रहेगा। और मुझे पता है कि अभी तुम गुस्से में हो इसलिए ये सब कह रहे हो। तुम गुस्सा मत किया करो। और तुम जैसे हो वैसे ही रहो। प्लीज बदलने की कोशिश मत करो। अगर बदलना ही चाहते हो तो अपना गुस्सा करना बंद कर दो। मुझे उससे डर लगता है।

मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि जो वो बोल रही है वो सच है कि जो मैं महसूस कर रहा हूं वो सच है। उस पर किस तरह से विश्वास करूं ये समझ नहीं आ रहा है। अब सिर्फ भगवान पर ही भरोसा है कि वो मुझे सही रास्ता दिखाएं। मैं तो यही चाहता हूं कि जो मैं सोच रहा हूं वो गलत ही हो। और मेरी नजरों में वो कभी भी झूठी ना बने। आप सबसे भी यही अनुरोध है कि आप भी मुझे कोई सलाह दें क्या वो सही कह रही है। क्या वाकई में उसकी भी कोई मजबूरी हो सकती है। जो शायद मैं नहीं देख पा रहा हूं। क्योंकि हर तरफ से हार मेरी ही है। क्योंकि अगर वो सच कह रही है और मैं उस पर विश्वास नहीं करता हूं तो भी। और अगर जो मैं महसूस कर रहा हूं। उसमें भी हार मेरी है।

Thursday, December 25, 2008

"तेरी याद साथ है"

हाय 'जान' आज 25 दिसम्बर है यानी 'क्रिसमस' पर हमेशा की तरह आज तुम मेरे पास नहीं हो। और न ही हमेशा की तरह आज तुम्हारा कोई मैसेज आया मुझे पता है इसकी उम्मीद कम है। पर फिर भी मैं वेट कर रहा हूं। आज ऑफिस की छुट्टी है पर घर पर भी मेरा मन नहीं लग रहा। सुबह से ही तुम्हारे ख्यालों में खोया हुआ हूं। मुझे याद नहीं की पिछले 5 सालों में ऐसा कभी हुआ हो की किसी फैस्टिवल पर तुम्हारा मैसेज न आया हो या तुमसे फोन पर बात न हुई हो। पर 'जान' ऐसा अब हमारे साथ क्यों हो रहा है। 'जान' मुझे अब ऐसा महसूस होने लगा है कि जैसे हम एक-दूसरे के लिए अजनबी से हो गए हैं। 'जान' तुम्हारे साथ की ऐसी आदत सी पड़ गई है कि हर पल तुमको अपने आस-पास ढूंढने की कोशिश करता हूं कि क्या पता कब तुम मुझको दिख जाओ। 'जान' ऐसा महसूस होता है जैसे किसी ने मुझे बीच रेगिस्तान में अकेला छोड़ दिया हो और मैं उस रेगिस्तान में पागलों की तरह तुमको ढूंढ रहा हूं न कोई तुम्हारा पता बताने वाला है न कोई मदद। सिर्फ दूर रेत में तुम्हारी एक परछाई दिखाई देती है मैं उसके पीछे पागलों की तरह भागता हूं। पर वो और दूर जाती दिखाई देती है। दिल के अंदर तुमको पाने की जो उमंगे उठी थी वो फिर रेगिस्तान के रेत की उस मृगतृष्णा में खो जाती है। फिर मुझे अहसास होता है कि तुम तो वहां कभी थी ही नहीं वो तो सिर्फ मेरी एक मृगतृष्णा थी।

'जान' तुम्हारे बिना मुझे ये पूरा शहर ये दुनिया अजनबी सी लगने लगी है। तुमको एक झलक देख लूं तो इस दिल को सुकून मिल जाए। 'जान' तुमको याद है जब तुम अपने इंटरव्यू के लिए एक बार यहां आई थी पर तुम अपनी पूरी फैमली के साथ थी तुम्हारे मम्मी, पापा और तुम्हारा छोटा भाई। और मैं तुम्हारी एक झलक देखने के लिए वहां पहुंच गया था। पर तुम मुझसे पहले ही इंटरव्यू के लिए पहुंच गई थी। और मैं कम्पनी के बाहर ही खड़ा तुम्हारा इंतजार कर रहा था। मुझे याद है तुमने ग्रीन कलर का टॉप और डार्क ब्ल्यू जींस पहन रखी थी, तुम्हारे बाल खुले थे। और तुम्हारे मम्मी-पापा भी साथ में थे। जब तुम गेट से बाहर निकली तो तुम्हारी एक झलक देखकर इस दिल को कितनी खुशी मिली मैं बयां नहीं कर सकता। सबके बीच में तुमने कैसे धीरे से हंसते हुए मुझे एक हाथ से हल्के से हॉय कहा और 'फ्लांइग किस' दी थी। ये सब कुछ मात्र 1 मीनट में हो गया। और तुम स्टील ब्राउन कलर की इंडिका में बैठकर जिसपर की (उत्तराखंड) की नम्बर प्लेट लगी थी, वहां से निकल गई। (और तुमको बताना चाहता हूं कि आज भी मैं उस (यूए) नम्बर प्लेट को ही सर्च कर रहा हूं कि शायद तुम दिख जाओ) तुम अपने पीछे धुंआ और मुझे छोड़ गई। मैं कुछ देर वहीं खड़ा तुमको जाते देखता रहा। जब तक की तुम्हारी गाड़ी मेरी नजरो से गायब नहीं हो गई। फिर मैं भी वहां से निकल गया। पर मैं तुमको बताना चाहता हूं कि 'जान' तुमको जाते देखकर उस दिन मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। मैं तुम्हारा हाथ पकड़कर तुमको रोकना चाहता था पर इस जमाने की जंजीरों ने मेरे पैरों को रोक लिया। उन कुछ ही पल मैं मुझे ऐसा लगा कि जैसे दुनिया की सारी खुशियां मुझे मिल गई हों और दूसरे ही पल किसी ने वो सारी खुशियां मुझसे छीन ली हों।

'जान' मुझे उस दिन बहुत दुख हुआ जब तुमने 'मैसेज' करके मुझे बताया कि तुम्हारा इंटरव्यू तो ठीक हो गया था पर तुम्हारे पापा की वजह से तुम वहां जॉइन नहीं कर पाई। और उसी वक्त देहरादून के लिए निकल गए। उस वक्त मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसका दी हो। मुझे नहीं पता कि उस वक्त तुमको कैसा महसूस हुआ। पर मुझे तो ऐसा लगा था कि किसी ने मेरी सांसों को रोक दिया हो।

'जान' मैं तुमको सिर्फ ये बताना चाहता हूं कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। अपनी जिन्दगी से भी ज्यादा। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता और न ही तुमको भूल सकता हूं। और तुमसे बस यही कहना चाहता हूं कि-
''मैं जहां रहूं, मैं कहीं भी हूं, तेरी याद साथ है।
किसी से कहूं, के नहीं कहूं, ये जो दिल की बात है।
कहने को साथ अपने एक दुनिया चलती है।
पर झुक के इस दिल में तन्हाई पलती है।

तेरी याद... साथ है, तेरी याद साथ है।

Wednesday, December 24, 2008

"मेरे जज्बात"

कल पता था कि उसका फोन नहीं आयेगा। पर फिर भी जाने क्यूं एक अनजान सी आशा में उसके फोन का इंतजार कर रहा था। अपने दिल को बार-बार यही कह कर बहला रहा था कि अ दिल इतना तेज मत धड़क थोड़ा और सब्र कर आज फोन नही आया तो क्या वो भी वहां बेचैन होगी। और वो भी मुझसे बात करने के लिए कल का इंतजार कर रही होगी। तो तू भी सब्र कर जब मेरी 'जान' इतना सब्र कर सकती है, तो क्या तू भी उसके लिए एक दिन का सब्र नहीं कर सकता। पर ये दिवाना दिल है कि आजकल मेरी कोई बात ही नहीं मानता है। खुद भी दुखी रहता है और मुझे भी दुखी करता है। पूरे दिन उसी के नाम लेता रहता है। और भगवान से हर दुआ में यही मांगता है कि भगवान उसको मुझसे कभी अलग मत करना। 'मेरी जान को मुझे वापस दिला दो।' मैं उसके बिना नहीं रह सकता, उसके बिना जिन्दगी की कल्पना भी नहीं कर सकता।

आज सुबह से ही एक अंजानी खुशी से दिल बाग-बाग हो रहा था। आज मेरी 'जान' मुझे फोन करेगी। मैं उससे अपने दिल की बांते शेयर करूंगा। उसको बताऊंगा कि 'जान' तुम्हारे बिना कल कुछ भी अच्छा नहीं लगा। और मैं कल भी तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था। कि शायद तुमको भी मेरी याद आ जाए और तुम कल भी फोन कर दो। बस यही सब कुछ सोचते-सोचते घर से निकल गया और पूरे रास्ते भर भी यही सोचता रहा कि आज उससे क्या-क्या बातें करूंगा। क्योंकि हमेशा यही होता है उसका फोन आने से पहले यही सोचता रहता हूं कि आज उससे ये बात पुछूंगा पर फोन आने के बाद उससे क्या बात करूं यही भूल जाता हूं। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। 10.13 मिनट पर उसका फोन आया। पता नहीं उसके फोन की वाईबरेशन सुनकर ही दिल में ऐसी ऊर्जा का संचार होता है जैसे हजार सूर्य एक साथ चमक उठे हों। मैंने फोन पिक किया और उसे 'हाय' कहा उसने भी 'हाय' कहा और फिर मैंने उसे कहा 'जान' 'आई लव यू'। उसने भी हंसते हुए कहा हां 'आई लव यू टू'। फिर उसने हंसते हुए पूछा कैसे हो। मैंने हल्की सी आवाज में कहा अच्छा हूं। तुम कैसी हो। उसने कहा मैं भी ठीक हूं। फिर मैंने उससे पूछा की कल क्या किया। उसने कहा कल। कल कुछ खास नहीं किया। सिर्फ क्लास से घर चली गयी। उसने कहा हां पता है, कल मैडम ने मुझे और मेरी कर्जन को डांटा। मैंने कहा क्यों? उसने बताया क्योंकि वो ठीक से नहीं पढ़ा रही इसलिए हमने उसकी शिकायत ''हैड'' से कर दी। तो वो इसी बात से नाराज थी कि अगर तुमको मुझसे कोई प्रोब्लम है तो पहले मुझसे कहो उसके बाद ऊपर शिकायत किया करो।''

फिर उसने पूछा और तुम बताओ कैसे हो। मैंने कहा वैसा ही हूं। फिर उसने कहा कि ''हां मैं कल थोड़ी देर के लिए नेट पर आई थी, भाई ने ही थोड़ी देर के लिए जोड़ा था। तो मैंने तुमको 'ऑरकुट' से एक र्स्कब किया है। पता नहीं तुम तक पहुंचा है कि नहीं। मैंने कहा ठीक है मैं चैक कर लूंगा। उसने एक स्क्रब भेजा था- ''हाय हाओ आर यू, आज ही खोला और स्क्रब किया, बाकी सब बाद में........।'' फिर मैंने उसको कहा कि पता है आज मैं क्या सोच रहा था कि तुम मुझसे पूछोगी कि तुमने कल क्या किया। तो मैं तुमको बताऊंगा कि कल मैंने क्या किया। उसने कहा अच्छा तो बताओं कल क्या किया। मैंने उसको कल की पूरी पोस्ट पढ़कर सुना दी। उसने कहा कि तुम बहुत अच्छा लिखते हो मैं इतना अच्छा नहीं लिख सकती। तुम्हारी शायरी बहुत अच्छी है। मैंने कहा 'जान' मुझे कोई शायरी, वायरी नहीं आती सिर्फ जो बात मेरे दिल में आती है वो मैं वैसे ही बयां कर देता हूं। कल की पूरी पोस्ट खत्म करने के बाद आखिर में मैंने उसे गीत की दो लाईने गाकर सुनाई- 'जान' तेरा नाम लिया, तुझे याद किया, तुझे याद किया तेरा नाम लिया.................. ओ हो... हो... तेरा नाम लिया। ये सुनकर वो जोर-जोर से हंसने लगी। और वो भी कहने लगी हां मैंने भी तुमको बहुत याद किया। फिर उसने मुझसे कहा कि 'जान' तुम भी बागबान फिल्म में अमिताभ बच्चन की तरह किताब लिखकर फेमस हो जाओगे। मैंने उससे कहा जान मुझे कोई किताब-विताब नहीं छपवानी। मैं तो सिर्फ तुमसे शादी करके तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। तुम्हारे करीब रहना चाहता हूं। उसने कहा हां शादी भी हो जाएगी। अब मैं चलूं कल फोन करूंगी। मैंने कहा 'जान' कल तो तुम्हारी छुट्टी होगी। क्योंकि कल तो क्रिसमस है। उसने कहा अरे हां मैं तो भूल ही गई। चलो मैरी क्रिसमस, मैंने भी उसे मैरी क्रिसमस कहा। फिर उसने कहा चलो तो मैं परसो तुमको फोन करूंगी।

मैंने कहा ठीक है 'एस यू विश' जब तुम्हारा मन करे कर लेना। उसने कहा प्लीज तुम नाराज मत होया करो। मैंने कहा मैं नाराज नहीं हूं। उसने कहा नहीं तुम हो। मैंने उसको फिर से यही की 'जान' मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। पता नहीं तुमको मेरे प्यार पर यकीन क्यों नहीं होता है। मैं तुमको सच्चा प्यार करता हूं। उसने कहा मुझे मालूम है तुम मुझे कितना प्यार करते हो मैं भी तुमको उतना ही प्यार करती हूं। अब मैं भी तुमको कैसे यकीन दिलाऊं। मैंने उससे कहा जान देखो तुम मेरा साथ मत छोड़ना मुझसे ही शादी करना किसी और से नहीं। उसने कहा हां जान मैं तुमको कभी नहीं छोडूंगी तुमसे ही शादी करूंगी किसी और से नहीं। मैंने कहा जान जिस दिन तुमने मुझे छोड़ा वा दिन मेरी जिन्दगी का आखरी दिन होगा। उसने कहा तुम प्लीज फिर से ऐसी बातें मत करो। मैंने कहा मैं सच कह रहा हूं। अब चलो तुम क्लास जाओ लेट हो जाओगी। और अपना ख्याल रखना खाना टाईम से खाना और मेडीसन टाईम से लेना। उसने कहा तुम भी अपना ख्याल रखना। मैंने कहा जान मैं तो आजकल बिल्कुल भी अपना ध्यान नहीं रखता। 'यू नो' परसो 2 हफ्ते में अपने शेविंग कि वो भी जब, जब कि मम्मी और कई जनो ने टोका कि तुमने इतनी शेविंग क्यों कर रखी है। उसने भी मुझे कहा 'जान' तुम अपना ख्याल रखा करो और शेविंग कर लिया करो मुझे बढ़ी हुई शेविंग पसंद नहीं है। फिर उसने मुझे कहा चलो अब मैं चलती हूं परसो बात करेंगे फिर उसने मुझे 'आई लव यू' कहा और मैंने भी फिर दोनों ने फोन पर किस किया और 'आई लव यू' कहकर फोन रख दिया।

Tuesday, December 23, 2008

"दिल की बेकरारी"

मुझे पता है आज तुम्हारा फोन नहीं आएगा। पर फिर भी ध्यान बार-बार मोबाइल कि तरफ जा रहा है। शायद तुमको भी मेरी याद आ जाए और तुम फोन कर दो। पता नहीं ऐसी बेचैनी क्यों हो रही है मुझे आजकल। किसी ने सच ही कहा है कि किसी की अहमियत इंसान को तभी होती है जब वो उससे दूर हो जाती है। और जब से तुम मुझसे दूर हुई हो तब से मुझे अहसास हुआ है कि मेरी लाईफ में तुम्हारी क्या इर्म्पोटेंस है।

'जान' क्या तुमको भी ऐसा ही अहसास नहीं होता जैसा कि मुझे हो रहा है। हमारे बीच की ये दूरियां तुमको भी बेचैन नहीं करती। पहले हम कैसे घंटो-घंटो बातें किया करते थे। मैसेज किया करते थे और जब याद ज्यादा ही बढ़ जाती थी या दोनों में से किसी की भी कॉल नहीं आती थी तो मिस कॉल दिया करते थे। और एक-दूसरे के रिप्लाई का वेट किया करते थे। आजकल तो ये सब खेल भी बंद हो गए हैं।

'जान' कल तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगा। इससे पहले दो दिन तक जब तुमसे बात नहीं हुई थी तो मेरा दिल तुमसे बात करने के लिए बहुत बेकरार था और उस बेकरारी को करार तभी मिला जब कल तुमसे बात की। आज भी उसी करिश्मे का इंतजार कर रहा हूं कि शायद फिर से तुम्हारी आवाज सुन सकूं। उम्मीद कम है पर उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है। खैर लिखने के लिए बहुत कुछ है बताने के लिए भी बहुत कुछ है। पर ये सब बेकार है जब तुम मेरे पास नहीं हो। आज का दिन इस इंतजार में निकाल दूंगा कि कल तो तुमसे बात होगी, कल तो तुम्हारी आवाज मेरे कानों को सुनाई देगी, कल तो तुम्हारी हंसी मेरे दिल को सुकून पहुंचाएगी, कल तो तुमसे अपना हाले दिल सुनाउंगा और कल तो तुम पूछोगी कि 'जान' तुमने कल क्या किया और मैं ये ही कहूंगा कि 'जान' - ''तेरा नाम लिया, तुझे याद किया, तुझे याद किया तेरा नाम लिया......................ओ हो.. हो... तेरा नाम लिया।'' 'आई लव यू' 'जान', 'आई मिस यू'।

Monday, December 22, 2008

"तेरी याद"

पिछले दो दिन से उससे बात नहीं की थी। शनिवार का तो दिन किसी तरह निकाल दिया था। पर कल रविवार का दिन बिताना मुश्किल हो गया। सुबह से ही मन उदास था। उसकी आवाज सुनने के लिए मेरे कान तरस रहे थे। दिल में एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी। मन बस उसके ख्यालों में ही खोया हुआ था। वो सारी पुरानी बातें याद आ रही थी जो कि मैंने उसके साथ बिताई थी। अपने आप को बिजी रखने के लिए सुबह अपने एक दोस्त के पास चला गया। उसके घर गया तो पता चला की वो साहब तो अभी सोकर उठा है ओर अभी नहा रहा है। खैर उसके घर थोड़ा वेट किया फिर उसके साथ बाहर घूमने निकल गया। पता नहीं तब भी मन कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। हम दोनों को घूमते-घूमते 3-4 घंटे हो गए। फिर एक पार्क में जाकर बैठ गए और ईधर-उधर की बातें करने लगे। पर इस बीच भी मेरा मन वहां नहीं था। वो किसी को 'मिस' कर रहा था। और शायद किसी को ढूंढ रहा था। और भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि भगवान उससे मुझे कभी भी अलग मत करना। मैं उसके बिना नहीं जी सकता। बस फिर 3 बजे घर आया और खाना खाकर लेट गया। पर नींद नहीं आई। फिर रात होते-होते उसकी याद भी बढ़ती चली गई और मन की उदासी भी। रात को खाना भी खाने का मन नहीं कर रहा था। पर फिर भी जबर्दस्ती खाया। और कल की पूरी रात बिना नींद के आंखों ही आंखों में निकाल दी। कभी-कभी सोचता हूं कि क्या इसी को प्यार कहते हैं।

आज सुबह जल्दी उठा क्योंकि नींद तो आई नहीं थी। फिर नहा-धोकर सबसे पहले पूजा की फिर मंदिर गया। जैसा कि हर सोमवार को जाता हूं। पर आज पूजा में भी मन नहीं लग रहा था। मन बार-बार उसी की तरफ जा रहा था। फिर मंदिर से आकर नाश्ता किया। और 9.30 बजे तक घर से निकल गया। बस मेरा ध्यान मेरे मोबाईल पर ही था। की कब ये वाईबरेट हो। मैं बड़ी बेचैनी से उसके फोन कॉल का वेट कर रहा था। खैर 10.24 मिनट पर मेरा इंतजार खत्म हुआ। फोन वाईबरेट हुआ। मैंने फोन देखा तो दिल को सुकून मिला। फोन पिक करते ही मैंने उसे 'हाय' कहा उसके 'हाय' बोलने से पहले ही मैंने उसे कहा 'जान' 'आई लव यू', वो हंसते हुए बोली 'हां आई लव यू टू' क्या हुआ। मैंने हंसते और एक्साईडेट होते हुए उससे कहा कि 'जान' मैं तुमको बता नहीं सकता कि मैं आज तुम्हारा कितनी बेताबी से इंतजार कर रहा था। मैंने उससे कहा 'आई मिस यू लाट' 'जान' कल से तुम्हारी इतनी ज्यादा याद आ रही थी कि मत पूछो। मैं तुमको बता नहीं सकता कि मैं तुमको कितना 'मिस' कर रहा था। उसने हंसते हुए कहा अच्छा। हां मैं भी तुमको बहुत मिस कर रही थी। मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी। फिर उसने पूछा अच्छा बताओ कि दो दिनों में क्या किया? मैंने कहा 'जान' सिर्फ तुमको 'मिस' किया और तुमको याद किया। वो फिर से हंसने लगी। फिर उसने कहा 'जान' ऐसा क्यों सोचते हो कि मैं तुमको छोड़ दूंगी मैं तुमको कभी नहीं छोडूंगी। मैं दिल्ली जरूर आऊंगी। पर पहले मुझे चण्डीगढ़ जाना पड़ेगा। क्योंकि मेरी नानी वहां रहती है और मुझे चण्डीगढ़ गए हुए कई साल हो गए हैं। और उन्होंने मुझे वहां बुलाया है। मैंने कहा 'जान' मुझे पता है कि तुम अगर चण्डीगढ़ गई तो वहां से कभी नहीं आओगी। वहीं कहीं जॉब कर लोगी। उसने कहा नहीं 'जान' वहां पर फैशन से रिलेडिट कोई इंडस्ट्रीज नहीं है। मैं दिल्ली ही आऊंगी तुम परेशान मत हो। मैंने कहा 'जान' मुझे नहीं पता तुम चण्डीगढ़ नहीं जाओगी। वहां जाकर तो तुम मुझे और भी भूल जाओगी। उसने कहा 'जान' तुम ऐसा मत सोचो मैं तुमको नहीं भूल सकती।

मैं जहां भी जाती हूं सबसे पहले तुमको ही बताती हूं। और शायद कुछ टाईम बाद मेरा मोबाईल भी मुझको मिल जाए। तो तुम परेशान मत हो हम हमेशा कांटेक्ट में ही रहेंगे। मैंने उससे सिर्फ इतना कहा कि 'जान' तुमको नहीं पता मैं तुमको कितना प्यार करता हूं। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं। उसने कहा मुझे पता है कि तुम्हारे जितना प्यार मुझे कोई नहीं करता। और मैं भी तुमको उतना ही प्यार करती हूं। फिर उसने कहा तुम अभी से परेशान मत हो मैं अभी कहीं नहीं जा रही हूं। जहां भी जाउंगी तुमको बता कर ही जाउंगी। और तुमसे बात करती रहूंगी। उसने कहा चलो अब मैं चलती हूं क्लास के लिए लेट हो रहीं हूं। बाकी बात परसो करूंगी। अब तुम हंसों और खुश रहा करो। मैं तुमको कभी नहीं छोड़ने वाली।

मैंने उससे कहा जान जिस दिन तुमने मुझे छोड़ दिया उस दिन शायद मैं जिंदा भी न रहूं। उसने कहा तुम ये ऐसी बातें मत किया करो। तुमको कुछ नहीं होगा। 'आई लव यू' मैंने भी उसको बोला 'आई लव यू टू' अपना ख्याल रखना। मेडीसन टाईम पर लेना। मैंने पूछा आज मेडीसन ली। उसने कहा आज मैं भूल गई मैंने उसको डांटा की देखो ऐसी लापरवाही मत किया करो अपना ख्याल रखा करो अब क्लास से जाने के बाद सबसे पहले मेडीसन लेना ओके। उसने कहा हां ठीक है। उसने भी कहा तुम भी अपना ख्याल रखना। खाना-पीना टाईम से खाना। और ज्यादा टेंशन मत लिया करो। हमेशा खुश रहा करो। चलो अब बॉय टेक केयर। अब परसो बात करेंगे। फिर दोनों ने फोन पर ही एक-दूसरे को किस किया और आई लव यू बोल कर फोन काट दिया।

Saturday, December 20, 2008

"साथ का वादा"

पिछले तीन दिनों से दिल को कुछ हल्का महसूस हो रहा है। जबसे उसने मुझसे शादी करने का वादा किया है। कल भी मैं उसके फोन का वेट कर रहा था। कल मुझे बेचैनी नहीं हो रही थी। क्योंकि मुझे लग रहा था कि वो फोन जरूर करेगी। 10:26 पर उसका फोन आया। मैंने फोन पिक किया और उसे 'हाय' कहा उसने भी 'हाय' कहा। वो कहने लगी क्या हुआ आज भी गुस्से में हो क्या। मैंने कहा नहीं तो तुमको तो मैं हमेशा गुस्से में ही लगता हूं। 'जान' अभी तो मैं तुमसे इतने प्यार से बात कर रहा हूं और तुमको अभी भी गुस्से में लग रहा हूं जब गुस्से में बात करूंगा तो पता नहीं तुमको क्या लगेगा। ये सुनकर वो 'हंसने' लगी।

उसकी हंसी सुनकर मेरे दिल को भी अच्छा लगा। फिर उसने कहा बताओ क्या कर रहे हो। मैंने कहा कुछ नहीं तुम्हारे फोन का ही वेट कर रहा था। उसने कहा तुम आज हंसते हुए अच्छे लग रहे हो। मैंने कहा हां मैं भी हंसना चाहता हूं पर तुमसे दूर रहकर मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। मैं बस तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। उसने कहा हां मुझे भी तुमसे दूर रहकर अच्छा नहीं लगता। मुझे भी तुम्हारी याद आती है। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम कैसी हो अब तुम्हारा जुकाम कैसा है उसने कहा अब ठीक है। पर यहां ठण्ड बढ़ गई है और बारिश भी होने वाली है। और मुझे ठण्ड भी ज्यादा लगती है। मैंने उससे कहा तुमने ठीक से कपड़े पहने हैं ना उसने कहा हां दो स्वेटर और एक क्रीम कलर की जैकेट पहनी है। मैंने कहा 'जान' तुम अपना ख्याल रखना और प्रोपर कपड़े पहनकर बाहर निकला करो नहीं तो सर्दी लग जाएगी। उसने कहा हां तुम भी अपना ख्याल रखना।

फिर मैंने उससे पूछा की जान तुम पक्का मुझसे शादी करोगी ना। उसने कहा हां पर तुम मुझसे वादा करो की तुम मुझसे हमेशा सच बोलोगे। कभी मजाक में भी मुझे झुठ नहीं बोलोगे। मैंने उससे कहा कि जान जैसा तुम कहोगी मैं वैसा ही करूंगा। फिर मैंने उससे कहा कि 'जान' मैं तुमको परेशान नहीं करना चाहता था। मैं भी तुमको भूल जाना चाहता था पहले मैंने यही सोचा था कि जब तुमको मेरी परवाह नहीं तो मैं भी तुम्हारी परवाह क्यों करूं पर मुझसे ये नहीं हुआ। मैं जितना तुमको भूलाने की कोशिश करता तुम्हारी और ज्यादा याद आती गई और मैं अपने को नहीं रोक पाया। बस हर पल यही लगता है कि भागकर तुम्हारे पास आ जाऊं। फिर उसने कहा क्या तुमको ये लगता है कि मुझे तुम्हारी परवाह नहीं है। अगर तुम्हारी परवाह न होती तो मैं रोज-रोज एसटीडी पर आकर तुमसे बात न करती। मैंने कहा नहीं जान मुझे कुछ नहीं पता मुझे क्या हो गया है। पर मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता। मुझे तुम्हारे साथ रहना है। उसने कहा हां जान मैं तुम्हारे साथ ही हूं और तुम्हारे पास ही रहूंगी। पर उसने मुझसे पूछा की क्या तुम मेरे लिए 2-3 साल तक और वेट कर सकते हो मैंने उससे कहा कि जान मैं तुम्हारे लिए जिन्दगी भर वेट कर सकता हूं। बस तुम ये बोलो की तुम हमेशा मेरा साथ दोगी। उसने कहा हां दूंगी।
मैंने कहा 'जान' मैंने अगर अपनी लाईफ में सबसे ज्यादा अगर किसी की परवाह कि है तो वो सिर्फ तुम्हारी। और इस बात का सबूत है कि मैं पिछले तीन महीनों से जबसे तुम्हारे घरवालों को हमारे बारे में पता चला है और तुम्हारा मोबाइल तुमसे लिया और जबसे हमारी बातचीत बंद हुई है मैं तब से आज तक सो नहीं सका हूं। और जितनी बेचैनी मुझे तीन महीने पहले थी उतनी ही बेचैनी अभी भी है और अगर मेरी बात में जरा भी झुठ हो तो मेरी अभी 'जान' निकल जाए। उसने कहा तुम फिर से मरने की बातें करने लगे। अगर अब तुमने फिर से मरने की बात की तो मैं फोन काट दूंगी। मैंने कहा जान मैं सच कह रहा हूं। तुमसे अलग और दूर रहकर मैं जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता हूं। उसने कहा मुझे पता है कि तुम सही हो और मुझसे सच्चा प्यार करते हो और मैं ये भी जानती हूं कि तुम मुझे बहुत खुश रखोगे। मैं भी तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं। पर अभी थोड़ा वेट करना पड़ेगा। मैंने उससे कहा 'जान' मैं तुम्हारा जिन्दगीभर वेट करूंगा। बस तुम मुझसे वादा करो की तुम मेरा साथ दोगी। कहीं अपनी फैमली के प्रेशर में आकर मुझे छोड़ तो नहीं दोगी। उसने कहा हां मैं तुम्हारा साथ दूंगी। फिर उसने कहा चलो अब मैं चलती हूं अब सोमवार को तुमसे बात करूंगी। मैंने कहा ठीक है मैं वेट करूंगा। तुम अपना ख्याल रखना और मेडीसन टाईम से लेना और खाना-पीना टाईम से खाना। उसने कहा और तुम भी अपना ख्याल रखना। मैंने कहा हां ठीक है। 'आई लव यू' 'जान' उसने भी कहा 'आई लव यू' और 'टेक केयर ऑफ यूवर सेल्फ'। मैंने कहा 'आई मिस यू जान' उसने भी कहा 'आई मिस यू टू' 'बॉय' 'लव यू' और फिर फोन कट गया।

Thursday, December 18, 2008

"आशा की किरण"

आज कल दिल की धड़कने फिर से तेज होने लगी हैं। बेचैनी भी बढ़ने लगी है। बस हर पल उसी के बारे में सोचने के सिवा और कुछ नहीं करता। चाहता हूं कि बस उसको किसी तरह विश्वास दिला दूं कि मैं उसे कितना प्यार करता हूं। उसे मेरे प्यार पर यकीन हो जाए। और वो जो मुझसे दूर जा रही है वापस मेरे पास आ जाए। अब यही लगता है कि अगर वो नहीं तो मैं इस दुनिया में जीकर क्या करूं और जीवन का अन्त करने मन करता है। बस यही कशमकश दिल के अन्दर चल रही है।

आज जब 10:23 मिनट पर उसका फोन आया तो मैं उसी के ख्यालों में खोया हुआ था। मैंने फोन पिक किया और 'हाय' कहा। उसने भी 'हाय' कहा। फिर मैंने उससे पूछा कि अब तुम्हारी तबियत कैसी है। उसने कहा मैं अब ठीक हूं, तुम कैसे हो। मैंने कहा मैं ठीक हूं। पर पता नहीं अब मैं उससे बात नहीं कर पाता। मेरी आवाज अपने आप धीमी हो जाती है। शायद उसको भी इसका अहसास हो गया था। उसने कहा कल तुमको क्या हो गया था। मैंने कहा कुछ नहीं। उसने कहा नहीं कल भी तुम्हारी आवाज बहुत धीमी आ रही थी। और आज भी ऐसा ही लग रहा है। कहीं तुम रो तो नहीं रहे। मैंने कहा नहीं उसने कहा तुम झुठ मत बोला मुझे पता है की तुम रो रहे थे। उसने कहा प्लीज तुम रोया मत करो मुझे दिल में कुछ-कुछ होता है। मैंने कहा मैं नहीं रो रहा। फिर मैंने उससे कहा कि 'जान' 'आई लव यू' मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। उसने कहा 'जान' 'आई लव यू टू' मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आती है। और तुम चिंता मत करो मैं तुमको कभी नहीं छोडूंगी। हमेशा तुमसे बात करती रहूंगी। फिर मैंने उसे कहा मैं तुमसे दूर रह कर नहीं जी सकता। मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। तुम्हारे पास रहना चाहता हूं। प्लीज तुम मेरी फीलिंग को समझो। मैंने उसको समझाया कि 'जान' पिछले पांच सालों में मैंने सिर्फ तुम्हारे बारे में सोचने के सिवा कुछ भी नहीं किया है। सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे बारे में सोचा है। और तुम मुझे बीच रास्ते में छोड़कर मत जाओं। मैं नहीं जी पाउंगा तुम्हारे बिना। 'जान' 'आई लव यू' और तुमको बहुत 'मिस' करता हूं। तुम्हारे सिवा मेरी लाईफ में और कोई भी इर्म्पोटिड नहीं है। सबसे ज्यादा तुम इर्म्पोटिड हो। 'जान' 'प्लीज' मुझे बीच रास्ते में मत छोड़ों।

उसने कहा प्लीज तुम ऐसी बाते मत करो। मैंने भी तुमसे सच्चा प्यार किया था। करती हूं और हमेशा करती रहूंगी। उसने कहा तुम ही मेरा पहला और आखरी प्यार हो। पर तुम रोया मत करो। तुम हंसते हुए अच्छे लगते हो। मैंने कहा 'जान' मेरा अब जीने का मन नहीं करता। तुमसे दूर रहकर अब मैं और नहीं जी सकता। मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ रहना है। नहीं तो मेरे लिए इस लाईफ का कोई मीनिंग नहीं। उसने कहा प्लीज तुम ऐसी बातें मत किया करो। नहीं तो मुझे गुस्सा आ जाएगा। और मैं तुम्हारी पीटाई कर दूंगी। तुम खुश रहा करो। मैंने कहा नहीं जान अब मैं नहीं जीना चाहता। फिर उसने कहा कि अगर मैं तुमसे शादी करना चाहूं तो भी नहीं। ये सुनकर मैं आश्चर्यचकित हो गया। मैंने कहा तुम सच कह रही हो या फिर से मजाक कर रही हो। उसने कहा मैं सच कह रही हूं। मैंने कहा खाओ मेरी कसम उसने कहा पहले तुम मेरी कसम खाओं की कभी रोओगे नहीं। मैंने उससे कहा 'जान' मैं तुम्हारी कसम नहीं खा सकता। क्योंकि जब भी तुम्हारी याद आती है तो मेरी आंखों से आंसू निकल जाते हैं। पर तुम मेरी कसम खाओं की तुम मुझसे ही शादी करोगी। उसने कहा हां जब मैं ठीक हो जाउंगी और जब मेरी मम्मी-पापा मेरे लिए रिश्ता ढूंढेंगे तो सबसे पहला नाम तुम्हारा होगा। मैंने कहा और इसमें कितना टाईम लगेगा। उसने कहा मुझे नहीं पता। पर इससे पहले अगर तुम्हारी शादी हो गई तो तुम कर लेना। मैं तुमको लटकाना भी नहीं चाहती। मैंने उससे कहा कि तुम फिर ऐसी बात मत कहो इसका मतलब तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहती। उसने कहा मैं सिर्फ कह रही हूं क्योंकि तुम्हारी भी तो 'ऐज' निकल रही है। मैंने कहा मैं तुम्हारे लिए जिन्दगी भर वेट कर सकता हूं। उसने कहा ठीक है। जब भी मेरे घरवाले मेरे लिए रिश्ता सर्च करेंगे तो तुम सबसे पहले होंगे। और मैं तुमको अपने घरवालों से भी मिलवाऊंगी। अब हंसो और हमेशा खुश रहा करो। मैं तुमको कभी नहीं छोडूंगी। फिर मैंने उससे कहा 'आई लव यू' 'जान' उसने भी 'आई लव यू' कहा। और कहा चलो अब मैं चलती हूं कल बात करूंगी। अब क्लास के लिए लेट हो रही हूं।

आज उसकी बात सुनकर मुझे घनघोर अंधेरे में आशा की एक किरण दिखी। काश! भगवान कुछ चमत्कार दिखा दे और जो वो कह रही है वो सच हो जाए। वो हमेशा के लिए मेरी हो जाए। तो ये दर्दे दिल का दर्द कम हो जाए। बस भगवान से यही दुआ है मेरी की वो आज की बात को सच कर दे।

Wednesday, December 17, 2008

"आई मिस यू 'जान'"

जाने आज फिर क्यों वही बिछड़ने का दर्द दुबारा से हो रहा है। आज फिर दिल में उसी तरह का दर्द उठ रहा है। वही बेचैनी, वही कशमकश दुबारा दिल के अंदर हो रही है। आज 10:30 तक भी जब उसका फोन नहीं आया तो फिर से दिल में बेचैनी बढ़ गई। मन बहुत उदास लग रहा था। कुछ भी करने का मन नहीं था। फिर अचानक 10:37 पर उसका फोन आया। मैंने फोन पिक किया और उसे 'हाय' कहा उसने भी 'हाय' कहा। पर आज पता नहीं क्यों मेरी आवाज में बहुत दर्द था। आज मुझसे फोन पर उससे बात भी नहीं हो रही थी। मैंने उसे आज कुछ भी नहीं कहा न ही डांटा जैसा की मैं अक्सर कर देता हूं। सिर्फ उससे पूछा की 'अब तुम कैसी हो, तुम्हारी तबियत कैसी है' उसने कहा मैं ठीक हूं तुम कैसे हो। मैंने कहा मैं ठीक हूं। फिर उसने कहा कि कल मेरी 'कर्जन' जो कि मेरे साथ कोर्स कर रही है वो मेरे घर आ गई और मम्मी ने उससे पूछा की तुम्हारी टाईमिंग क्या है। उसने बता दिया कि 10.30 से है तो मम्मी ने मुझसे पूछा की तो तुम इतनी जल्दी क्यों जाती हो। तो मैंने कहा कि मैं रोज थोड़ी जल्दी जाती हूं जब स्कुटी में पेट्रोल डलाना होता है तब जाती हूं। और जब एक्सट्रा क्लास होती है तब जाती हूं। बस इतना कहकर उसने मुझसे कहा चलो अब मैं चलती हूं। क्लास शुरू आने वाली है और मेरी कर्जन मेरा वेट कर रही होगी। क्योंकि उसने आज मुझे 10।45 तक क्लास में आने के लिए कहा था। मैं तुमसे कल बात करूंगी।

पता नहीं आज क्यों मैं उससे बात नहीं कर पा रहा था। मेरे मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी। मैंने उससे सिर्फ इतना कहा 'जान' 'आई लव यू' मैं तुमको बहुत 'मिस कर रहा हूं' मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है। उसने कहा हां मैं भी तुमको मिस करती हूं। फिर मैंने उससे कहा कि मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है कुछ भी करने का मन नहीं करता। हर वक्त तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूं। उसने भी कहा और मैं भी। उसने कहा चलो अब मैं चलती हूं। हंसते हुए 'बॉय' कहो। पर मुझसे हंसा ही नहीं जा रहा था। मैंने उसे कहा मुझे अभी हंसी नहीं आ रही है। उसने कहा प्लीज तुम हंसते रहा करो। मैं तुमसे बात करना कभी नहीं छोडूंगी। 'आई लव यू'। फिर मैंने कहा तुम बस अपना ख्याल रखना और मेडिसीन टाईम पर ले लेना और खाना भी टाईम से खाना और बस अपना ख्याल रखना। बस आज इससे ज्यादा मुझसे और कुछ नहीं बोला गया। फिर उसने फोन काट दिया।

Tuesday, December 16, 2008

"तुझ में रब दिखता है"

कल पूरे दिन भगवान से प्रार्थना करता रहा कि भगवान उसे जल्दी से ठीक कर दे। उसकी जगह मुझे बिमार कर दे। बस बार-बार यही विचार मन में आ रहा था कि किसी तरह उसके पास पहुंच जाऊं, उससे उसका हाल पुछूं कि 'जान' तुम कैसी हो अब तुम्हारी तबियत कैसी है, तुम घबराओ मत मैं तुम्हारे पास हूं। तुम जल्दी ठीक हो जाओगी। आज भी ऐसा ही लग रहा था। सुबह उठकर नहा-धोकर पुजा की और भगवान से प्रार्थना की कि प्रभु उसे जल्दी ठीक कर देना।

आज नहीं लग रहा था कि उसका फोन आयेगा। फिर मैं लगभग 10 बजे तक घर से निकल गया। और तभी 10:10 मिनट पर फोन में वाइबरेशन हुई, मैंने फोन देखा तो फोन उसी का था। मैंने फोन पिक किया। उसे 'हाय' बोला। उसने भी मुझे 'हाय' बोला। मैंने उससे पूछा अब कैसी हो। उसने कहा मैं ठीक हूं। तुम कैसे हो मैंने कहा मैं ठीक हूं। फिर उसने पूछा की तुमको मेरा मैसेज मिल गया था। मैंने कहा हां मिल गया था और तब से अपने ऊपर गुस्सा आ रहा है। उसने कहा क्यों। मैंने कहा बस ऐसे ही। फिर मैंने उससे कहा Sorry उसने कहा क्या, मैंने फिर कहा Sorry उसने कहा किस लिए। मैंने कहा मुझे तुमको उस दिन इतना कुछ नहीं बोलना चाहिए था। मुझे उसके बाद रिएलाइज हुआ कि शायद मैंने तुमको कुछ ज्यादा ही बोल दिया था। तुमको बहुत बुरा लगा होगा। उसने कहा नहीं मुझे बुरा नहीं लगा अच्छा हुआ तुमने मुझे डांटा इससे तुम्हारे दिल की सारी भडास निकल गई। फिर मैंने उसको अपने दिल की सारी बात बताई कि 'जान' मेरा ऐसा मन कर रहा था कि मैं भाग कर तुम्हारे पास आ जाऊं और तुम्हारी केयर करूं, तुम्हारा सिर दबाऊ, अपने हाथ से तुमको खाना खिलाउ और मेडीसन भी दूं। उसने कहा इतना ख्याल तो मम्मी भी मेरा नहीं रखती। और ये सब करने के बाद मेरा फीवर तुमको ट्रांसफर हो जाता। मैंने कहा मुझे परवाह नहीं मैं बस तुमको खुश देखना चाहता हूं।

मैंने कहा पर शायद मुझे लगता है कि तुम मुझसे खुश नहीं हो। इसलिए मैं तुमसे बहुत दूर जाना चाहता हूं। उसने कहा जहां भी जाओ मुझे अपना नम्बर ई-मेल कर देना। मैंने कहा शायद। उसने कहा इसका मतलब तुम मुझसे बात नहीं करना चाहते। मैंने कहा मैं तुमको भूलना चाहता हूं। और शायद तुम भी यही चाहती हो। मेरी वजह से तुम दुखी रहो या डिस्ट्रब रहो ये मुझे बर्दाश्त नहीं। उसने कहा मैं तुम्हारी वजह से दुखी नहीं हूं। उसने कहा हां अगर तुमको कोई और पसंद आ गई है तो मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है। मैंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है। अब और कोई इस दिल में आएगी भी नहीं। पहली बार में ही दिल इतनी जोर से टूटा है कि अब तक दर्द करता है। अब और दुबारा दिल तुड़वाने की ताकत मुझ में नहीं है। मैं तुमसे सिर्फ एक बात कहना चाहता हूँ कि 'आई लव यू' और हमेशा करता रहूंगा। मैं तुमको दुखी नहीं देख सकता। मैंने कहा लगभग 3 महीने हो गए हैं मुझे सोए हुए। पूरी रात जागता रहता हूं। उसने कहा मैं भी तुमको मिस करती हूं पर मैं तो तुमको याद करते-करते सो जाती हूं। मैंने कहा यही फर्क है तुम में और मुझ में मैं तुम्हारी याद में जागता रहता हूं और तुम सो जाती हो। मैंने कहा जिस दिन तुम मुझको बोल दोगी की मैं तुमसे बात नहीं करना चाहती। उस दिन के बाद मैं तुमसे कभी बात नहीं करूंगा। उसने कहा अब तुम ऐसी बात करोगे। मैंने कहा नहीं मैं बस तुमको दुखी नहीं देख सकता। उसने कहा मैं तुमसे दुखी नहीं हूं। मैं भी तुमसे प्यार करती हूं और करती रहूंगी। मैंने कहा ठीक है जब तक तुम मुझे मना नहीं करोगी मैं भी तुमसे बात करूंगा। उसने कहा चलो अब मैं कल बात करूंगी। मैंने कहा ठीक है अपना ख्याल रखना और दवाई टाईम पर लेना और खाना भी ठीक से खाना। मैं कल तुम्हारा वेट करूंगा। 'आई लव यू' 'टेक केयर'।

कल एक फिल्म देखी 'रब ने बना दी जोड़ी' उसमें शाहरूख खान, अनुशका शर्मा से यही पूछता है कि 'आखिर एक लड़की क्या चाहती है।' शायद यही सवाल मेरा भी था। उसमें अनुशका बताती है कि एक लड़की एक ऐसा साथी चाहती है जो कि उसे किसी से भी ज्यादा प्यार करे। उसे दौलत-शौहरत नहीं चाहिए न ही एक साथी के रूप में एक बॉडीगार्ड जो कि अपनी मसल्स दिखाकर उसके आसपास घूमता रहे।'' लेकिन बेचारा शाहरूख खान जिसने की इस फिल्म में दो किरदार निभाएं हैं एक में बिल्कुल सिम्पल मीडिल क्लास जो कि अनुशका का पति है और दूसरे में एक दम हिरो की तरह डैशिंग। और वो भी अनुशका को बहुत प्यार करता है। पर वो ही उसके प्यार को समझ नहीं पाती। लग रहा था कि बिल्कुल सेम कहानी मेरी ही चल रही है फर्क सिर्फ इतना है कि उसमें शाहरूख की शादी अनुशका से हो चुकी थी और मेरी कहानी में वो मुझसे शादी नहीं करना चाहती। अगर वाकई में लड़की को सिर्फ एक ऐसा साथी चाहिए जो कि उसे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करे तो मेरी स्टोरी में वो मेरे प्यार को क्यों नहीं समझ पा रही है। मैं भी उसे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता हूं। और उसे हमेशा खुश देखना चाहता हूं। उस फिल्म में शाहरूख खान को अनुशका में 'रब' दिखता है और बाद में अनुशका को भी शाहरूख खान में 'रब' दिख जाता है। पर मेरी कहानी में मुझे तो उसमें 'रब' दिख रहा है। लेकिन पता नहीं उसे मुझमें कब 'रब' दिखेगा।

'जान' मैं तुमसे यही कहना चाहता हूं कि-

तू ही तो जन्नत मेरी, तू ही मेरा जूनून
तू ही तो मन्नत मेरी, तू ही रूह का सुकून
तू ही आंखों की ठंडक, तू ही दिल की है दस्तक
और कुछ ना जानू मैं, बस इतना ही जानू..
तुझ में रब दिखता है, यारा मैं क्या करूं
तुझ में रब दिखता है, यारा मैं क्या करूं
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करूं

तुझ में रब दिखता है, यारा मैं क्या करूं

Monday, December 15, 2008

"आई केयर यू"

कल शाम को 5 बजे उसका मैसेज आया। उसमें उसने लिखा था- ''हाय 'जानू' मैं कल तुमको कॉल नहीं कर पाउंगी क्योंकि उस दिन मुझे जुकाम था और अब बुखार, बहाना नहीं मार रही सच कह रही हूं। क्लास भी नहीं जाउंगी 'विल कॉल यू ऑन टियूस्डे और वेडनसडे' 'आई लव यू' गुस्सा मत होना। मैं उससे कहना चाहता हूं कि 'जान' मैं गुस्सा नहीं हूं, मैं तो तुमसे Sorry कहना चाहता था उस दिन के लिए और सोमवार का वेट कर रहा था कि जल्दी से सोमवार आए और मैं तुमको उस दिन के बिहेवियर के लिए Sorry बोलूं पर उससे पहले ही तुम्हारा मैसेज आ गया। मैसेज पढ़कर मुझे बहुत हर्ट हुआ। पता नहीं तुम्हारी तबियत कैसी होगी। आज मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आ रहा है कि मैंने तुमको इतना क्यों डांटा। 'आई लव यू' 'जान' मेरा मन ऐसा कर रहा है कि काश! इस वक्त मैं तुम्हारे पास होता तुम्हारी देखभाल करता तुम्हारी केयर करता, तुम्हारा सिर दबाता और तुम्हारे बालों को अपनी उंगलियों से सहलाता, तुमको टाईम पर मेडिसन देता, खाना खिलाता और बस पूरे दिन तुम्हारे पास रहता। मैंने भगवान से प्रार्थना की है कि वो तुमको जल्दी से ठीक कर दे। और तुम्हारी सारी बिमारी मुझे दे दें। तुम हमेशा हंसती रहो खुश रहो। तुम्हारे सारे गम मुझे मिल जाएं। और मेरी सारी खुशियां तुमको। 'जान' अपना ख्याल रखना। मैं तुमसे कहना चाहता हूं कि 'जान' मुझे तुम्हारी बहुत केयर है। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। 'आई लव यू' तुम चाहे मुझे प्यार न भी करो तब भी मैं तुमसे हमेशा प्यार करूंगा। कभी-कभी तुम पर गुस्सा हो जाता हूं। पर मेरे उस गुस्से में भी तुम्हारे लिए प्यार होता है। 'जान' आई लव यू'।

Saturday, December 13, 2008

"उफ़ मेरा गुस्सा"

कल उसका फोन नहीं आया। और आज कोई उम्मीद भी नहीं थी पूरी रात उसके बारे में ही सोचता रहा कि आखिर उसने कल फोन क्यों नहीं किया। रोज सुबह जल्दी उठ जाता हूं पर आज उठ कर के दुबारा से लेट गया और 9:00 बजे उठा ऐसा लग रहा था कि लाईफ में जैसे कोई एक्साईटमेंट ही नहीं हो। फिर नहा-धोकर रोज की तरह पुजा की और फिर नाश्ता करके घर से निकल गया। आज बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि आज कोई उम्मीद भी नहीं थी कि उसका फोन आयेगा इसलिए मैंने एक बार भी मोबाईल को नहीं देखा। फिर ऑफिस आकर काम में लग गया। आज ऑफिस में भी बहुत काम था। इसलिए सुबह पोस्ट करने का टाईम नहीं मिला।

तभी 11:21 मिनट पर फोन में वाईबरेशन हुई। मैंने मोबाइल उठाकर नम्बर देखा तो मैं हैरान रह गया। फोन देहरादून से ही था। मैंने फोन रिसीव किया। उसने हंसते हुए 'हाय' कहा। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं उसे क्या कहूं। पर मैंने भी उसे 'हाय' कहा। और उससे पूछा की ''तुमको फुर्सत मिल गई फोन करने की।'' उसने कहा हां तुमसे बात करने का मन कर रहा था। मैंने कहा आज कैसे घर से निकल गई क्योंकि आज तो तुम्हारी छुट्टी होती है। उसने कहा हां बस निकल गई क्योंकि आज मैडम ने बोला था कि की तुम्हारी एक्सट्रा क्लास है। सुबह 10 से 11 इसलिए अब आकर तुमको फोन किया। मैंने कहा इस 'फोरमैलटी' की भी क्या जरूरत थी। न भी करती तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता किसी की सेहत पर। उसने कहा मैं कल भी फोन करने वाली थी, पर जिस एसटीडी से मैं फोन करती हूं वो एसटीडी बंद थी और दूसरी वाली में फोन खराब था इसलिए कल मैं फोन नहीं कर पाई। मैंने कहा तुम्हारे पास मेरी हर बात का एक्सक्युज होता है। और अगर वो दो एसटीडी बंद थी तो इसका मतलब की पूरे जहान की एसटीडी बंद थी। उसने कहा कि तुम अब लड़ो मत मुझसे मैं सच कह रही हूं। मैंने कहा अगर कोई प्रोब्लम थी भी तो तुम मुझे कम से कम एक मैसेज तो करके बता सकती थी। तो उसने कहा हां कर तो सकती थी 'बट' मैंने तुमको बताया न की जिस फोन से मैं तुमको छुप कर मैसेज करती हूं उसमें बैलेंस नहीं है। फिर उसने कहा अब जहां से मैं फोन कर रही हूं, उसकी owner भी कह रही है कि जल्दी करो और भी फोन करेंगे उसने कहा चलो मैं तुमको किसी दूसरी जगह से फोन करती हूं, अगर टाईम मिला तो मैंने कहा इसकी कोई जरूरत नहीं है तुम अपना टाईम खराब मत करो तुमको घर जाना होगा तो तुम घर जाओं मैं जीयूं या मरूं तुमको क्या फर्क पड़ता है। मुझपर इतना अहसान करने की जरूरत नहीं है। उसने कहा मैं अहसान नहीं कर रही हूं मेरा भी मन है बात करने का मैं पक्का तुमको फोन करूंगी। उसने कहा 'बाय' मैंने भी 'बाय' कहा फिर उसने कहा 'आई लव यू' मैंने भी कहा 'आई लव यू' और फोन काट दिया।

फिर 11:48 पर उसका दूबारा फोन आया। उसने कहा तुम मुझसे लड़ों मत मैंने कहा था न कि मैं दुबारा फोन करूंगी। मैंने कहा फोन करके तुमने मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया। उसके लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद। उसने कहा मैंने कोई उपकार नहीं किया। मेरा मन था तुमसे बात करने का इसलिए फोन किया। फिर मैंने उससे कहा कि तुम मुझसे क्या चाहती हो। उसने कहा मैं कुछ नहीं चाहती मैं तुमसे प्यार करती हूं। मैंने कहा प्यार का मतलब भी समझती हो। उसने कहा हां जानती हूं। उसने कहा तुम क्या सुनना चाहते हो मुझसे की मैं तुमसे प्यार नहीं करती। मैंने कहा मैं सच सुनना चाहता हूं। अगर अब मैं तुम्हारे लिए एक परेशानी बन गया हूं तो मुझे बता दो मैं हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारी जिन्दगी से निकल जाउंगा। उसने कहा मैं एसा नहीं चाहती तुम ही शायद ऐसा चाहते हो कि मैं तुमसे बात न करूं पर मैं तुमसे हमेशा बात करती रहूंगी जब तक की तुम मुझे मना नहीं करते फोन करने या बात करने से। मैंने कहा ये मैं नहीं तुम ही ऐसा चाहती हो। मुझे तो ये तुम्हारी ही स्ट्रटेजी लगती है कि मुझे इसी तरह परेशान करती रहो एक दिन ये खुद ही थककर तुमसे बात करना बंद कर देगा। उसने कहा जी नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती। ऐसा सिर्फ तुमको लग रहा है। वो शायद इसलिए कि अब हम पहले की तरह 'टच' में नहीं रहते पहले हम रोज फोन पर बात किया करते थे। मैसेज किया करते थे और 'मिस कॉल' दिया करते थे। और 24 घंटे सिर्फ एक दूसरे के बारे में ही सोचते रहते थे। अब मैं क्या करूं मेरा फोन अब मेरे पास नहीं है। इसलिए तुमको ऐसा लग रहा है। उसने कहा मैं अभी भी तुमसे प्यार करती हूं।

मुझे नहीं पता की वो जो कह रही है वो सच कह रही है या झुठ मैंने उसको भी यही बोला की मुझे नहीं पता जो तुम कह रही हो वो सच है या झुठ पर देखा अगर जो तुम सच कह रही हो तो ठीक है अगर ये सब तुम झुठ बोल रही हो तो इस बात का अहसास तुमको एक न एक दिन जरूर होगा कि तुमने किसी को धोखा दिया है। और किसी के दिल के साथ खेला है। तुम चाहे जितनी इज्जत शोहरत और पैसा कमा लो पर तुम्हारी आत्मा तुमको ये हमेशा याद कराती रहेगी कि तुमने किसी को धोखा दिया था। वो तुमको कभी भी चैन से रहने नहीं देगी और इस बात का अहसास तुमको आज नहीं तो कल या 10 साल बाद या 50 साल बाद जरूर होगा। जब तुम्हारे पास कोई नहीं होगा। सिवाये तन्हाई के तब तुमको मेरी ये सब बातें जरूर याद आएंगी और ये एहसास होगा कि सच्चे प्यार को ठोकर मारकर और किसी के दिल को तोड़कर तुमने कितना बड़ा पाप किया था।

ये सब सुनकर उसकी आवाज नहीं निकली और वो बिल्कुल चुप हो गई मैंने उससे पूछा तुम सुन रही हो उसकी आवाज रोने जैसी हो गई। और बोली हां। फिर मैंने सोचा की शायद मैंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया है। और बात को डाईवरट करते हुए मैंने उससे पूछा 'आई लव यू' और उससे भी पूछा 'यू लव मी और नॉट' उसने कहा हां। मैंने कहा क्या 'यू लव मी नॉट' उसने कहा नहीं 'आई लव यू' तब वो थोड़ी हंसी। मैंने कहा मुझे लगा की तुम कह रही हो 'यू लव मी नाट'। फिर मैंने उससे कहा कि तुमको मेरी बातें अच्छी नहीं लग रही होंगी। उसने कहा नहीं अच्छी लगी। मैंने कहा शायद तुमको मेरी बातें प्रवचन लग रही होंगी। उसने कहा हां। मैंने कहा ये प्रवचन नहीं है, सच है।

फिर मैंने उससे पूछा की अब कब फोन करोगी उसने कहा अब मैं नहीं बताउंगी क्योंकि अगर फिर फोन नहीं कर पाई तो तुम फिर गुस्सा करोगे। मैंने कहा ऐसी बात नहीं है। तुम सोमवार को फोन करना। उसने कहा ठीक है। मैं सोमवार को फोन करूंगी। उसने कहा अब मैं चलती हूं क्योंकि घर जाकर मम्मी को सारी रिपोर्ट देनी पड़ती है। मैंने कहा ठीक है जाओं उसने कहा 'आई लव यू' मैंने भी कहा 'आई लव यू टू'।

Friday, December 12, 2008

"उसका वादा"


आज फिर वो वादा करके, वादा खिलाफी कर गई। पता नहीं वो ऐसा मेरे साथ क्यों करती है। कल उसने खुद ही कहा था कि मैं तुमको कल फोन करूंगी। क्योंकि 13-14 तारीख को यानी शनिवार, रविवार को इंस्ट्टीयूट की छुट्टी रहेगी। आज सुबह से बेसर्बी से उसके फोन का वेट कर रहा हूं। उसकी आवाज सुनने के लिए मेरे कान तरसते रहते हैं। अगर उसे बात नहीं करनी थी तो मुझे कह देती कम से कम मैं इंतजार तो नहीं करता। क्योंकि ये इंतजार की घड़ियां बहुत लम्बी होती हैं। और इस इंतजार को आजकल मुझसे ज्यादा कौन समझ सकता है। हर पल ऐसा लगता है कि कहीं अब उसका फोन ना जाये। पता नहीं वो मेरी इस बेचैनी को क्यों नहीं समझती है। पता नहीं मैं उसको कैसे समझाऊ कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं। मुझे डर इस बात है कि जब तक वो मुझको समझेगी तब तक शायद मैं इस दुनिया में न रहूं। पर मैं उसको बताना चाहता हूं कि 'जान' मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। 'आई लव यू' 'जान'

Thursday, December 11, 2008

"दिल को सुकुन"

भगवान का लाख-लाख शुक्रिया कि आज उसका फोन आ गया। कल की पूरी रात सो नहीं पाया। मन में ऐसा लग रहा था जैसे की किसी ने मेरी जिन्दगी मुझसे छीन ली है। वो सारे पल याद आ रहे थे, जो मैंने उसके साथ बिताए थे। हमारी वो पहली मुलाकात जब मैं उससे पहली बार मिला था। और उसको पहली बार देखा था। उसका वो घबराया हुआ सा चेहरा आज भी मेरी आंखों से हटता नहीं जब उससे पहली बार हाथ मिलाया था तो उसका हाथ जोर-जोर से कांप रहा था। मैंने बड़े प्यार से उसका हाथ थामा और उसको विश्वास दिलाया कि वो डरे ना।

खैर पूरी रात सो नहीं पाया। जागता रहा। सुबह होते ही नहा-धोकर सबसे पहले पुजा की। अपने दिल का हाल उसके सिवा सिर्फ भगवान को बता सकता हूं। क्योंकि वे सबके दिल का हाल जानते हैं। हाथ जोड़कर अपनी सारी मन:स्थिति भगवान को बता दी। और भगवान से प्रार्थना की कि प्रभु दो दिन हो गए उसका कोई फोन नहीं आया। और मुझे डर है कि अगर आज नहीं आया तो फिर कभी भी नहीं आयेगा। भगवान से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि प्रभु आज उसका फोन आ जाए। फिर मम्मी ने नाश्ता लगा दिया। करने का मन नहीं था फिर भी जबर्दस्ती किया क्योंकि अगर नहीं करता तो मम्मी परेशान हो जाती। और उनकी तबियत भी आजकल ठीक नहीं है। इसलिए जल्दी से नाश्ता करके 9:30 तक घर से निकल गया। और रास्ते में जितने भी मंदिर आए सबमें हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करता रहा कि प्रभु आज उसका फोन जरूर आ जाए।

10:00 बजे तक ऑफिस आ गया। पर उसका फोन नहीं आया। ज्यादातर 10:15 तक उसका फोन आ जाता है। जब 10:15 तक भी उसका फोन नहीं आया तो फोन आने की सम्भावना कम हो गई। और मेरा दिल भी बैठने लगा। अब मैंने उम्मीद भी छोड़ दी। तभी 10:26 मिनट पर फोन में वाइबरेशन हुई और मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गई। मैंने जल्दी से फोन उठाया नम्बर देखकर दिल को सुकुन मिला फोन उसी का था। मैंने जल्दी से फोन पिक किया। और अपनी दर्द भरी आवाज से उसे 'हाय' किया। उसने भी 'हाय' किया। मैंने उससे कहा 'थैंक गोड' तुमने फोन किया। दो दिन से तुम्हारे फोन का वेट कर रहा हूं। और मेरे दिल में भी कुछ अजीब-अजीब सा हो रहा है। अगर आज तुम्हारा फोन नहीं आता तो शायद मुझे कुछ हो जाता। उसने कहा ऐसी बात मत करो। मैंने उससे पूछा कि तुमने दो दिन तक फोन क्यों नहीं किया। उसने कहा 9 तारीख की 'ईद' की छुट्टी थी और कल 10 तारीख को 'देहरादून' बंद था। इसलिए मैं फोन नहीं कर पाई। मैंने उससे कहा कम से कम एक मैसेज तो कर सकती थी। उसने कहा हां पर जिस फोन से छुप कर वो मुझे कॉल करती है उसका बैलेंस खत्म हो गया था। मैंने उसे बताया कि तुम्हारा फोन ना आने से मुझ पर क्या-क्या बीती मैंने उससे कहा कि अगर मुझे मारना ही है तो एक ही बार मना कर दो मैं एक ही बार मर जाउंगा, यूं इस तरह इंस्टालमेंट में 'हार्ट अटैक' तो मत दो। उसने फिर से कहा कि ये फालतू की बकवास मत करो। तुमको कुछ नहीं होगा।

उसने कहा कि तुम ही तो कहते हो कि कर लेना हफ्ते 10 दिन में कॉल। मैंने उससे कहा इसका मतलब की तुम्हारा मन नहीं करता मुझसे बात करने का। इसलिए तुम ये कह रही हो उसने कहा करता है इसलिए तो तुमको फोन करती हूं। उसने कहा मैं भी तुमको मिस करती हूं। और मुझे पता है कि तुम पर क्या बीतती होगी। पर क्या करूं तुम भी तो मुझसे लड़ते रहते हों। मैंने कहा मैं कोई तुमसे 'इंटेशनली' नहीं लड़ता तुमसे प्यार करता हूं। और जब बहुत फस्टे्रट हो जाता हूं तो अपना गुस्सा तुम पर निकाल लेता हूं क्योंकि मेरी लाइफ में अगर मैंने सबसे ज्यादा किसी की परवाह की है तो सिर्फ तुम्हारी इसलिए तुम पर गुस्सा करके अपना मन हल्का कर लेता हूं। और फिर बाद में तुमसे Sorry भी तो मांग लेता हूं। अगर तुमको ये अच्छा नहीं लगता तो ठीक है अब से दुबारा तुमको कुछ नहीं कहुंगा। उसने कहा ठीक है कर लेना गुस्सा पर इतना ज्यादा भी मत किया करो। आज कल तुम्हारी सारी बातें बहुत सीरियस लगती हैं। और मैंने तुमको बोला न की मैं तुमको फोन करना नहीं छोडूंगी।

उसने कहा चलो अब मैं तुमको कल फोन करूंगी। क्योंकि परसो शनिवार है और फिर दो दिन तक इंस्ट्टीयूट बंद रहेगा। मैंने कहा चलो ठीक है मैं कल वेट करूंगा। उसने कहा ठीक है मैं कल पक्का फोन करूंगी। 'आई लव यू', मैंने भी कहा 'आई लव यू', 'टेक केयर', अपना ख्याल रखना और मेडीसन टाईम पर लेना और खाना भी टाईम से खाना। उसने भी कहा तुम भी अपना ख्याल रखना और 'टनशन' मत लेना। फिर दोनों ने फोन पर ही 'किस' किया। और फिर उसने फोन रख दिया।

Wednesday, December 10, 2008

"मेरी बेचैनी"

आज भी उसका फोन नहीं आया। दिल बहुत बेचैन है। अपने आप को सम्भालने की बहुत कोशिश कर रहा हूं। कभी किसी से बात करता हूं कभी किसी से ताकि अपने को बिजी रखूं और उसकी याद न आए पर फिर भी पता नहीं क्यों बार-बार ध्यान उसी की तरफ चला जाता है। और उसका चेहरा मेरी आंखों में समा जाता है और बेचैनी फिर से उतनी ही बढ़ जाती है। बार-बार फोन को जेब से निकाल कर देखता हूं कि कहीं वो बंद तो नहीं हो गया और ठीक से चल तो रहा है। डर लगता है कि पता नहीं अब दुबारा उसका फोन आयेगा भी या नहीं। कहीं वो उसका लास्ट फोन तो नहीं था। 'जान' प्लीज मुझे फोन करो। मैं तुमको बहुत मिस कर रहा हूं। कहीं तुम नाराज तो नहीं हो गई मुझसे उस दिन तुमसे थोडा Rudly बात की थी इस कारण। बट 'जान' मेरी तुमको नाराज करने की कोई इंटेंशन नहीं थी। 'आई लव यू' 'जान', 'आई लव यू', और 'मिस यू'

Tuesday, December 9, 2008

"इंतजार"

बस मुझे उसकी यही बात अच्छी नहीं लगती। कल बोला की मैं तुमको कल फोन करूंगी 10-11 के बीच अब 11 बज गए हैं और मैं इंतजार कर-कर के थक गया हूं। पता नहीं वो ऐसा मेरे साथ क्यों करती है। मुझे कल ही लग रहा था कि वो मुझे फोन नहीं करेगी। इसलिए मैंने उससे नहीं कहा कि तुम फोन करना। मैंने उससे यही पूछा की अब कब फोन करोगी। तो खुद ही मुझसे पूछने लगी की तुम बताओं कब करू। मैंने उससे कहा जब तुम्हारा मन करे तब करना सिर्फ मेरे कहने से तुम मुझे फोन करो इसका कोई मतलब नहीं है। इसका मतलब तो ये है कि तुम सिर्फ मेरे कहने से ही फोन करती हो। वरना तुम्हारा मन नहीं करता मुझसे बात करने का। तो उसने खुद ही कहा था कि चलो मैं तुमको कल फोन करूंगी। मैंने भी उससे कहा कि मैं वेट करूंगा। पर जैसे उसको तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता की कोई उसके लिए वेट भी कर रहा है।

आज शायद ईद है। इसलिए शायद उसकी क्लास की छुट्टी होगी। और ये बात उसको कल क्लास जाने के बाद ही पता चली होगी। पर ये बात वो मुझे एक फोन करके भी बता सकती थी। कल क्लास के बाद की 'जान' कल मैं फोन नहीं कर पाउंगी क्योंकि कल क्लास की छुट्टी है। पर उसको तो काई फर्क ही नहीं पड़ता कि कोई बेवकुफ भी है जो की उसका बेसर्बी से इंतजार कर रहा है।

खैर लगता है मेरी किस्मत में तो इंतजार ही करना रह गया है। तो इंतजार करेंगे उसको चाहे मेरी परवाह हो या न हो पर मुझे हमेशा उसकी परवाह रही है और हमेशा रहेगी। 'आई लव यू' 'जान'।

Monday, December 8, 2008

"उसकी आवाज"

आज दो दिन बाद फिर से 10.16 मिनट पर उसका फोन आया। कल की भी रात मैंने आँखों में निकाल दी। पता नहीं क्या हो गया है मुझे। आज कल उसके फोन आने पर भी मुझे ऐसा महसूस होता है कि जैसे वो मेरा प्यार नहीं है, वो कोई और लड़की है जिस लड़की से मैंने प्यार किया था। ये वो लड़की नहीं लगती। अब मुझे ये भी नहीं पता कि ये मेरा वहम है या सच्चाई। क्योंकि वो मुझसे अभी भी कहती है कि मैं तुमसे अभी भी बहुत प्यार करती हू। पर मुझे उस प्यार का अहसास क्यों नहीं होता। जैसे की पहले होता था। आजकल उसके हर शब्द मुझे बनावटी से लगते हैं। काश! जैसा मैं सोच रहा हूं ऐसा न हो। ये मेरा वहम ही हो तो अच्छा है। पर अगर यह सच है तो मेरे लिए जीना बहुत मुश्किल हो जाएगा। आज दो महीने हो गए हैं मुझे चैन से सोए हुए। जब भी सोने के लिए आंखे बंद करता हूं तो उसी का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ जाता है। उसकी हंसी, उसकी आंखों की चमक मुझे सोने ही नहीं देती। हर पल उस तक पहुंचने की कोशिश करता हूं। कि बस एक बार और उसे देख लूं और एक बार फिर उसको अपनी बाहों में कसकर पकड़ लूं। एक बार फिर उसे 'किस' कर लूं। पर अचानक आंखें खुल जाती है। और उसकी सारी यादें मेरी आंखों के सामने से ओझल हो जाती हैं।

आज भी जब 10.00 बजे तक उसका फोन नहीं आया तो फिर से मुझे बेचैनी होनी लगी। आज फिर से लगा कि आज भी वो फोन नहीं करेगी। घर से आते वक्त मेरा सारा ध्यान मेरे मोबाईल पर ही था। की पता नहीं कब उसका फोन आ जाए। मैं बस से उतर गया और पैदल चलने लगा। मैं अपने मन को यही समझा रहा था कि कोई बात नहीं उसका फोन जरूरी आयेगा। और जैसे की उसने मेरे मन की बात सुन ली। मोबाईल में वाईबेरेशन हुई। और मैंने जल्दी से स्क्रीन की तरफ देखा तो एसटीडी कोड देखते ही मन को सकून मिला। फोन उसी का था। मैंने फोन पिक किया। और उसे 'हाय' कहा उसने भी मुझे हाय कहा। फिर उसने मुझसे पूछा की और बताओ तुमने दो दिन क्या किया। मैंने उससे कहा तुम मेरा छोड़ों अपना बताओं तुमने दो दिनों तक क्या किया। उसने कहा मैंने तो कुछ नहीं किया। सिर्फ तुम्हें याद किया। मैंने उससे कहा झुठ बोल रही हो। उसने कहा नहीं सच्ची में तुमको ही याद किया। उसने पूछा तुमने क्या किया। मैंने कहा कुछ नहीं सिर्फ कल बेवकुफ ही तरह तुम्हारे फोन कॉल का इंतजार करता रहा। क्योंकि तुमने कहा था कि मैं तुमको कॉल करूंगी। उसने कहा हां कहा तो था पर मैं कर नहीं सकी समय नहीं मिला। फिर मैंने कहा ठीक है। फिर मैंने पूछा तुम कैसी हो, उसने कहा मैं ठीक हूं तुम कैसे हो। मैंने कहा जैसा हमेशा था वैसा ही हूं। फिर उसने कहा कि कल हम एक पड़ोसी की शादी में गए थे। मैंने कहा बहुत अच्छी बात है। तो खुब इंज्योय किया होगा। क्योंकि अब तो तुमको फोन पर परेशान करने वाला भी कोई नहीं है। उसने कहा नहीं कल पहली बार मैंने शादी में इंज्योय नहीं किया। क्योंकि तुम्हारे फोन पर परेशान करने की आदत जो हो गई है। मैंने कहा चलो जानकर खुशी हुई की तुम अभी भी मुझे 'मिस' करती हो। तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया। उसने कहा इसमें शुक्रिया की क्या बात है। मैंने कहा कि तुम अभी भी इस गरीब को याद करती हो। तो उसने भी टोन मारते हुए कहा कि 'mention not'।

पता नहीं ये मुझे क्या होता जा रहा है कि आजकल जब भी उससे बात करता हूं। मैं उससे कुछ कह ही नहीं पाता। मुझे ऐसा लगता है कि अगर मैं उससे कुछ बोला और मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया तो कहीं ये मुझसे बात करना बंद ना कर दे। क्योंकि आजकल मेरे अंदर गुस्सा कुछ ज्यादा ही रहता है। वो बार-बार मुझसे यही कहती रही की तुम भी कुछ बोलो मैं ही इतनी देर से बोल रही हूं। क्या तुम्हारे पास कुछ नहीं है कहने के लिए। मैंने कहा तुम बोलती रहो मुझे तो तुम्हारी आवाज सुनने का मन कर रहा है। फिर उसने कहा कि अब मैं और क्या बोलू इतनी देर से बोल ही तो रही हूं। फिर मैंने कहा चलो कोई गाना ही सुना दो। उसने कहा मुझे गाना नहीं आता। फिर मैंने कहा चलो 'फना' फिल्म की वो पंक्तियां सुना दो जो तुमने मुझे लिख कर दी थी। उसने कहा कौन सी मैंने कहा अब क्या वो भी भूल गई हो। फिर उसने दो लाईने मुझे सुनाई- तेरे हाथ में, मेरा हाथ हो....... । बस इतना ही सुना पाई।

खैर फिर काफी देर हो चुकी थी। मैंने उससे कहा- 'आई मिस यू' उसने कहा क्या मैंने फिर से कहा 'आई मिस यू' फिर उसने भी कहा हां 'आई मिस यू टू' पर अब जाना पड़ेगा क्योंकि क्लास के लिए लेट हो रही हूं। मैंने कुछ नहीं कहा मैंने कहा ठीक है- जाओ, उसने कहा तो ठीक से 'बाय' तो बोल तो। मैंने कहा बोल तो रहा हूं। 'बाय'। उसने कहा नहीं तुम दिल से नहीं बोल रहे हो। फिर मैंने कहा ओके 'बाय' 'टेक केयर', अपना ख्याल रखना मेडिसेन टाइम से खाना और खाना भी टाइम से खाना। फिर मैंने उससे पूछा की फिर कब फोन करोगी। उसने कहा थैंक गोड, मुझे तो लगा कि तुम ये भी नहीं पूछोगे। उसने मुझसे पूछा बताओ कब करू मैंने कहा, मुझे क्या पता जब तुमको मेरी याद आ जाए, जब मन करे तब कर लेना- हफ्तेभर बाद या 10 दिन बाद। उसने कहा अब तुम फिर से गुस्सा करने लगे ठीक हैं मैं तुमको कल फोन करूंगी। मैंने कहा कल चलो ठीक है मैं वेट करूंगा। फिर उसने मुझे कहा 'बाय' मैंने भी कहा 'बाय' फिर उसने कहा 'आई लव यू', मैंने भी कहा 'आई लव यू'। मैंने कहा खुश रहना। उसने भी कहा तुम भी खुश रहा करो, अपना ख्याल रखा करो। और गुस्सा मत किया करो। मुझे तुमसे डर लगता है। जब तुम ऐसी बातें करते हों। बस उसके बाद उसने कहा चलो अब तुम फोन रखो। मैंने कहा तुम रख दो उसने कहा नहीं मैं नहीं रखूंगी तुम रखो। फिर मैंने उसे 'आई लव यू' कह कर फोन कट कर दिया।

Friday, December 5, 2008

"हाले दिल"

आज फिर से 10:15 पर उसका फोन आया। आज मैं घर पर ही थोड़ा लेट हो गया था। इसलिए जल्दी-जल्दी घर से निकला ताकि उसका फोन आने से पहले बाहर आ जाऊ। जब उसका फोन आया तो मैं बस में था। आज ट्रेफिक भी बहुत था। और बस में भी बहुत भीड़ थी। फोन बजते ही मेरी दिल की धकड़कने तेज हो जाती हैं। आज उसका फोन आने में 10 मिनट की देर हो गई और इतने में ही मेरे दिल में पता नहीं क्या-क्या विचार आने लगे। खैर मैंने फोन पिक किया उसने हाय कहा, मैंने भी उसको हाय कहा। फिर उसने पूछा कैसे हो। मैंने कहा ठीक ही हूं। तुम कैसी हो। उसने कहा मैं भी ठीक हूं। मैंने उसको बोला की मुझे तो लग रहा था कि आज तुम फोन नहीं करोगी। फिर उसने कहा तुमको ऐसा क्यों लगता है। मैंने कहा मुझे नहीं पता जब भी तुम फोन रखकर जाती हो तो मुझे लगता है कि आज ये तुम्हारा आखरी फोन है। फिर उसने पूछा कि कल तुमने पूरा दिन क्या किया। मैंने उसको बोला कि तुम्हारा फोन रखते ही नेट पर जाकर अपनी सारी बातें जो हमने फोन पर की थी। ब्लॉग पर चढ़ा दी। मेरे पास तो तुम्हारे बारे में सोचने के सिवा और कोई काम ही नहीं होता है। फिर मैंने पूछा कि तुमने क्या किया कल पूरे दिन। उसने कहा मैंने कुछ नहीं किया सिर्फ क्लास के बाद घर चली गई और मॉडल के ड्राईंग स्कैच बनाने की प्रैक्टिस की।

पता नहीं उसका फोन आने से पहले मैं सोचता हूं कि आज उससे बहुत सारी बातें करूंगा पर उसका फोन आने के बाद मैं कुछ बोल ही नहीं पाता और हमारा ज्यादा टाईम तो लड़ने में ही निकल जाता है। उसे हमेशा यही लगता है कि मैं उससे लड़ रहा हूं। पर मैं उससे लड़ना नहीं चाहता। सिर्फ मन में गुस्सा आ जाता है। जब भी वो कुछ गलत बोल देती है। मुझे उसकी सबसे बुरी बात यही लगती है कि वो कभी भी अपने फैसले खुद नहीं ले पाती है। हमेशा जो मम्मी-पापा ने बोल दिया वही पत्थर की लकीर है। उन्होंने बोल दिया कि ये कपड़े पहनने हैं, ये खाना, खाना है ये कोर्स करना है तो वो ही कर लिया। जबकि उसका खुद का फैशन डिजाईनिंग का कोर्स कम्पलिट हो चुका है। और उसका खुद का इन्ट्रेस्ट भी डिजाईनर बनने का है पर वो नहीं करना अब मम्मी ने बोल दिया कि तुमको B।Ed करना चाहिए तो अब वो करना है। कुछ दिन पहले नानी आई तो नानी ने बोला कि तुम मेरे साथ चण्डीगढ़ चलो मैं तुमको बटाटा बढ़ा, कचौड़ी-पकौड़ी और खाना बनाना सिखाऊंगी और तुम्हारे लिए वहीं कोई जॉब ढूंढ लूंगी तो मैडम उसके लिए भी तैयार हो गई। यही सब बातें हैं जो मुझे गुस्सा लाने पर मजबूर करती हैं। मैंने उसको यही बोला की जब तक तुम अपने फैसले खुद नहीं लेने सिखोगी तब तक कुछ नहीं हो सकता। अब पता नहीं उसे मेरी कितनी बात समझ आई या नहीं आई। पर मैं उसे हमेशा खुश देखना चाहता हूं। कामयाब देखना चाहता हूं। पर वो मेरे बारे में क्या सोचती है मुझे अभी भी नहीं पता।

खैर मैं चाहता हूं कि मेरे मरने से पहले वो मेरे प्यार को समझ ले। उसको इस बात का अहसास हो जाए कि कोई था जिसने तुमको इतना प्यार किया। जिसके लिए इस दुनिया में तुमसे ज्यादा और कोई मायने नहीं रखता। जिसका दिल सिर्फ तुम्हारे लिए ही धड़कता है। जिसकी सांसो में सिर्फ तुम्हारा नाम है। तुम ही मेरी मंजिल हो। तुम ही मेरा प्यार। आई लव यू 'जान'।

Thursday, December 4, 2008

"आज की बात"

आज सुबह 10:05 पर उसका फोन आया मैं उसके फोन का वेट ही कर रहा था। फोन की वाइबेरेशन से मैंने अन्दाजा लगा लिया कि फोन उसी का है। क्योंकि उसके अलावा इतने सुबह मुझे कोई फोन नहीं करता। और फोन पर एसटीडी कोड देखकर conform हो गया कि फोन उसी का है। दो दिन से उसका फोन नहीं आया था। और मुझे कुछ अच्छा भी नहीं लग रहा था। मैंने फोन पिक किया तो दूसरी तरफ से उसकी आवाज सुनाई दी। जैसे जान में जान आ गई हो मेरी। उसने हंसते हुए मुझसे हाय कहा मैंने भी उसको हाय कहा। फोन आने से पहले मैं यही सोच रहा था कि आज उससे क्या-क्या पूछूंगा और क्या-क्या कहूंगा। सबसे पहले मैंने उससे पूछा कि तुम कैसी हो उसने कहा मैं तो ठीक हूं, तुम कैसे हो। मैंने कहा मैं भी ठीक हूं, इतना कहते ही मेरा सारा दर्द मेरी जबान पर आ गया। मैंने मन में सोचा कि ये कैसा सवाल है, तुमसे दूर रहकर मैं कैसे ठीक हो सकता हूं। और मेरी आवाज मंदी हो गई। उसने पहचान लिया कि मैं ठीक नहीं हूं। पर मैंने उसको यही कहा कि मैं ठीक हूं। उसने फिर कहा नहीं मुझे पता है कि तुम ठीक नहीं हो। फिर मैंने अपने को संभाला और अपनी फिलिंग को अंदर छुपाकर हंसते हुए कहा कि अरे यार मैं ठीक हूं। फिर मैंने उससे पूछा कि और बताओ दो दिनों में क्या-क्या किया। उसने कहा कि मैं और उसकी बहन और दोनों भाई ''दोस्ताना'' फिल्म देखने गए। मैंने कहा कि बकवास फिल्म है। फिर उसने मुझसे पूछा कि तुमने क्या किया दो दिनों में। मैंने कहा कि कुछ नहीं सिर्फ घर से ऑफिस, और ऑफिस से घर। और तुमको याद किया। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या तुमको मेरी याद नहीं आती। तुमने मुझे याद नहीं किया। उसने हंसते हुए कहा कि हां किया तुमको याद, तुम्हारी याद आती है। मैंने कहा कैसे याद आती है। उसने कहा कि हम कैसे-कैसे मिले, सांई बाबा के मंदिर गए, मैंने तुमको देहरादून घूमाया। और तुमने मुझे छेड़ा। और फिर रेस्टोरेन्ट में बैठे जिसमें कि कोई नहीं आता था। लेकिन उसने वो बात नहीं बोली जो मैं सुनना चाहता था। मैं उससे बार-बार वो ही सवाल करता रहा कि और कैसे, और कैसे याद किया। पर वो नहीं बोली जो मैं सुनना चाहता था। फिर मैंने उससे पुछा कि वो सब याद नहीं है जो हमने वहां किया। तो उसने कहा कि वो मैं भूल गई। बस इसी बात पे मेरी उससे लड़ाई हो गई। मैंने उससे कहा कि आज जब तुम वो ही भूल गई हो तो कल को मुझे भी भूल जाओगी। उसने कहा नहीं मैं तुमको नहीं भूल सकती। मैंने कहा 'जान' तुम मुझको भी भूल जाओगी। फिर वो कहने लगी क्या है तुमको मैं तुमको कभी नहीं भूल सकती। तुम क्यों लड़ रहे हो मुझसे।

पता नहीं मुझे भी क्या हो जाता है मैं भी आजकल बहुत संकुचित हो गया हूं। जबसे दोनों के बीच ये दूरियां आई हैं मुझे हर पल ऐसा ही लगता है कि वो मुझसे दूर हो गई है। और एक दिन मुझे छोड़ देगी और मुझसे दूर चली जाएगी। मैं उसको किसी भी तरह ये बताना चाहता हूं कि मैं उसको कितना प्यार करता हूं। वो समझे कि मैंने उससे सच्चा प्यार किया है। और हमेशा करता रहूंगा।

आखिर में उसने कहा कि चलो अब मैं फोन रखती हूं। इस एसटीडी का बैलेंस खत्म होने वाला है और मेरी क्लास भी शुरू होने वाली है। फिर मैंने उससे कहा कि तुम्हारे लिए क्लास इंर्पोटेंट है मैं नहीं। ठीक है तुम अपनी क्लास में जाओं। उसने कहा नहीं तुम इंर्पोटेंट हो मेरे लिए क्लास नही। फिर मैंने कहा चलो तुम क्लास जाओ। और कल फोन जरूर करना क्योंकि इसके बाद दो दिनों तक तुम्हारी क्लास की छुट्टी रहेगी। उसने कहा ठीक है मैं कल तुमको फोन करूंगी और तब बताऊंगी कि और कैसी याद आती है तुम्हारी। मुझे तब हंसी आ गई। मैंने कहा ठीक है आज सोचकर बताना। और अपना ख्याल रखना, ब्रेकफास्ट, लंच और डीनर टाईम पर करना। और अपनी मेडीसन टाईम पर लेना। फिर उसने भी कहा कि तुम भी अपना ख्याल रखना और खाना टाईम से खाना और ज्यादा गुस्सा मत किया करो। आज का आधा घंटा तुमने मुझसे लड़ाई करने में निकाल दिया। मैंने उससे कहा 'जान' मैं लड़ नहीं रहा था। मैं सिर्फ तुमको बता रहा था कि इन दो महीनों में मुझपर क्या-क्या बीती है। और तुम्हारा मुझे पता नहीं की तुमने मुझको याद भी किया है कि नहीं। क्योंकि हमारी तब से जितनी बार भी फोन पर बात हुई है। मैंने हमेशा तुमको यही बात बोली है कि 'जान' मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पा रहा हूं, मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता, खाना खाने का मन नहीं होता, रात को नींद नहीं आती, कहीं घूमने का मन नहीं करता। फिर उसने कहा कि हां मेरे साथ भी ऐसा होता है। मैंने कहा ये बात तुम मेरे कहने के बाद कह रही हो। इससे पहले भी तो कह सकती थी ना।

बस इसके बाद मैंने उससे कहा कि चलो बाकी बात बाद में करेंगे। अब तुम अपनी क्लास में जाओ। उसके बाद मैंने उसे "आई लव यू" बोला और उसने भी। और फोन कट कर दिया।

Wednesday, December 3, 2008

"मेरा दर्द"

बड़े अजीब हैं ये जिन्दगी के रास्ते,

अनजान मोड़ पर कुछ लोग दोस्त बन जाते हैं,

मिलने की खुशी दे या न दे,

बिछड़ने का गम जरूर दे जाते हैं

मत करो कोई वायदा जिसे तुम निभा न सको,

मत चाहो उसे जिसे तुम पा न सको,

प्यार कहां किसी का पूरा होता है,

इसका तो पहला शब्द की अधूरा होता है।

मेरी हर खता पर नाराज न होना,

अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना,

सुकून है देख कर आपकी मुस्कुराहट को,

मुझे मौत भी आए तो भी मत रोना।

भूलना तुम्हें न आसान होगा,

जो भूले तुम्हें वो नादान होगा,

आप तो बसते हो रूह में हमारी,

आप हमें न भुलाएं ये आपको अहसान होगा।

कभी किसी से जिक्र-ए-जुदाई मत करना,

इस दिल से कभी रुसवाई मत करना,

जब दिल उठ जाए हमसे तो बता देना,

ना बता कर बेवफाई मत करना।

Tuesday, December 2, 2008

"उसकी याद"

आज फिर से मन कुछ भारी-भारी लग रहा है। कल उससे बात हुई थी तो कुछ मन हल्का हो गया था। पर आज फिर से ऐसा लग रहा है कि जैसे वो फिर से इस दुनिया की भीड़ में कहीं खो गई है। और उससे contact करने का मेरे पास कोई साधन नहीं है। हमेशा ऐसा ही लगता है जब वो फोन रखती है तो लगता है कि शायद आज ये उसका आखिरी फोन था। अब वो कभी फोन नहीं करेगी। और मैं फिर से अनिश्चिता के अंधेरे में खो जाता हूं। उस समय मुझे वो पूराने दिन याद आते हैं जब हम एक दूसरे के contact में रहते थे। इस बात को अभी समय ही कितना हुआ है। लगभग 2 महीने। इन 2 महीनों में मेरी सारी जिन्दगी बदल गई। हमारा एक-दूसरे से सम्पर्क का माध्यम सिर्फ मोबाइल ही तो था। जबसे उसके घरवालों ने उसका मोबाइल लिया है। तब से ऐसा महसूस होता है कि किसी ने मेरी सांसो को मुझसे छीन लिया है। कभी-कभी मन करता है कि भाग कर उसके पास पहुंच जांऊ। पर ये दो राज्यों की दूरी और समाज का भय और उससे भी ज्यादा की कहीं उसी ने मुझसे मिलने से मना कर दिया तो मैं बिल्कुल टूट जाऊंगा। क्योंकि वो देहरादून में है और मैं दिल्ली में। उससे मुश्किल से मैं सिर्फ चार बार ही मिला हूं। लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि मैं उसको कितने जन्मों से जनता हूं।

सच में उससे दूर होना मेरे लिए एक बहुत ही दु:खद अनुभव है। उसके बिना कितने समय तक जिंदा रहूंगा मुझे नहीं पता 'जान' आई लव यू। तुम अपना ख्याल रखना। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। मुझ पर हमेशा विश्वास रखना।

Monday, December 1, 2008

"उसका जवाब"

दो दिन पहले उसने मुझे अपना जवाब देने के लिए कहा था। आज दो दिन पूरे हो गए। पर ये दो दिन मेरे लिए कैसे गुजरे मैं उनको शब्दों में बयां नहीं कर सकता। एक-एक पल ऐसे निकला जैसे कि सौ-सौ जन्म। हर पल यही सोचता रहता था कि पता नहीं उसका जवाब क्या होगा। मेरे फेवर में होगा या मेरे अगेन्सट। आज की पूरी रात मैंने जागते हुए निकाली। कल मेरे दोस्त की शादी भी थी। पर मेरा मन वहां पर नहीं लग रहा था। शायद मैं शादी में जाता भी नहीं पर वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त है। अगर मैं वहां नहीं जाता तो शायद वो मुझसे कभी बात नहीं करता। इसलिए मैं वहां गया पर मेरे मन में हर पल उसी की याद घूम रही थी कि पता नहीं उसका क्या जवाब होगा। finally सुबह हुई और मैं उठा और नहा-धोकर सबसे पहले मंदिर गया और वहां जाकर भगवान से प्रार्थना की कि भगवान आज वो अपना जवाब देने वाली है। उसका जवाब मेरे फेवर में हो। भगवान आज आप कुछ ऐसा चमत्कार दिखा देना। फिर घर आकर के अपनी रोज का पूजापाठ और गीता का पाठ पढ़ा। तब भी मन में यही द्वन्द्व चल रहा था कि आज वो क्या जवाब देगी। फिर पूजा-पाठ करने के बाद मम्मी ने चाय बना दी। चाय पीने तक लगभग 10 बज चुके थे। मैं उसके फोन का इंतजार बेसर्बी से कर रहा था। 10:08 मिनट पर मेरे फोन की बैल बजी फोन उसी का था। मेरे दिल की धड़कने तेज हो गई। जैसे कि आज मेरा कोई रिजल्ट आने वाला हो। मैंने फोन पिक किया और उसे हॉय कहा और उसने भी। फिर मैंने उसको पूछा कि कैसी हो, उसने कहा अच्छी हूं। मैंने कहा मुझे नहीं लग रहा था कि तुम आज फोन करोगी। उसने कहा जब बोला था कि करूंगी तो तुमको क्यों लग रहा था कि नहीं करूंगी। मैंने कहा मुझे नहीं पता। फिर मैंने कहा मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे आज मेरा फाइनल का रिजल्ट आने वाला है। उसने भी कहा कि मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कि आज मेरा Exam है। फिर मैंने उससे पूछा- ''तो क्या जवाब है। उसने कहा रिजल्ट तुम्हारे Favor में नहीं है। मैंने कहा ओके। मैंने पूछा क्यों नहीं है। उसने कहा वो इसलिए क्योंकि मुझे कुछ प्रोब्लम है। मैंने पूछा क्या प्रोब्लम है। फिर उसने बताया कि उसे कुछ मेडिकली प्रोब्लम और उसका ट्रिटमेंट चल रहा है।" ये प्रोब्लम उसने मुझे पहले भी बताई थी। पर मैंने उसपर इतना विचार नहीं किया था। मैं उस बीमारी को सबको नहीं बताना चाहता। उसने मुझसे कहा है कि मैं उसकी बीमारी को किसी और को ना बताऊ। मैंने उससे कहा कि क्या सिर्फ यही एक कारण है कि तुम मुझसे शादी नहीं कर सकती या कोई और भी कारण है। उसने मुझसे कहा कि सिर्फ यही कारण है इसलिए मैं तुमसे शादी नही कर सकती। क्योंकि मेरे घरवाले भी मेरी शादी नहीं करेंगे जब तक मैं पूरी ठीक नहीं हो जाती। फिर मैंने उसे समझाया कि 'जान' एक बात बताओ की अगर ये बीमारी तुमको शादी के बाद हो जाती तो क्या मैं तुमको तलाक दे देता या तुमको घर से निकाल देता। या अगर शादी के बाद मेरा भी Accident हो जाता और मेरी टांग टूट जाती तो भी क्या तुम मुझे छोड़ देती। ऐसा नहीं होता 'जान' मुझे तुम अब भी Accept हो तुम जैसी भी हो। मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है।

वो फिर भी नहीं मान रही थी। उसका कहना था कि तुम तो Accept कर लोगे But तुम्हारी मम्मी मुझे बाद में ताने देगी। मैंने उसे बहुत समझाया कि 'जान' तुम डरो मत तुमको कोई कुछ नहीं कहेगा। मेरी मम्मी तुमको कुछ नहीं कहेगी। पर वो फिर भी नहीं मान रही थी। बहुत समझाने के बाद भी जब वो नहीं मानी तो मैंने उससे कहा कि 'जान' मैं तुम्हारा जिन्दगी भर Wait कर सकता हूं। जब तक तुम ठीक नहीं हो जाती। कम से कम मुझे इतना हक तो दे दो कि जब तुम ठीक हो जाओगी तो हम शादी कर लेंगे। अब चाहे तुम जब भी ठीक हो, मैं तुम्हारा तब तक Wait करूंगा। तब उसने कहा ठीक है। तब जाकर मेरी जान में जान आई कि अब मैं उसके लिए कितना भी समय Wait कर सकता हूं। मुझे इस बात की भी खुशी है कि कम से कम अभी भी वो मुझसे से टच में है। अभी भी मुझसे बात करती है। अभी भी प्यार करती है। पर इस सबके साथ-साथ एक डर भी है कि कहीं वो मेरा साथ ना छोड़ दे। और कहीं मुझसे बात करना बंद ना कर दे।

'जान' कुछ भी हो जाए तुम मुझसे बात करना मत छोड़ना। और मुझसे प्यार करना बंद मत करना। क्योंकि मैं भी नहीं कर सकता। 'आई लव यू'

Saturday, November 29, 2008

''तुम्हारी याद''

हाय 'जान' आजकल ऐसा क्यों होता है। तुम्हारी याद हर पल, हर सकेंड, हर मिनट आती है। बल्कि अब पहले से भी ज्यादा आती है। जब तुम मेरे साथ थी। कभी-कभी तो इतनी ज्यादा आती है कि दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं। सांसे धीमी पड़ जाती हैं। और पसीने छूट जाते हैं। पता नहीं तुमको भी मेरी याद इसी तरह आती है या नहीं। 'जान' मैं तुमको बहुत याद करता हूं। 'जान' तुम मुझको समझने की कोशिश करो। 'आई लव यू' 'जान'।

Friday, November 28, 2008

''पहला पोस्ट मेरे प्यार के नाम''

हाय डियर,

बहुत दिनों से मेरे दिल में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे कि पता नहीं ऐसा क्या हुआ कि तुम कुछ ही पलों में मुझसे इतनी दूर हो गई कि मुझे लग रहा है कि अब चाह कर भी तुमको पा नहीं सकता। ऐसी मेरे प्यार में कहां कमी रह गई की तुमको अपना पूरा प्यार जता नहीं सका। तुमको पता है कि जिस दिन से हम दोनों के बीच में बातचीत बंद हुई है और जुदाई की खाई इतनी चौड़ी हो गई है कि मैं लाख कोशिश करके भी उसे पार नहीं कर सकता। वो इस कारण नहीं कि वो खाई ज्यादा गहरी है, इस खाई को तो मैं शायद पार भी कर लेता परन्तु तुम्हारा विश्वास ही मुझ पर से उठ गया जो कि मेरी सबसे बड़ी ताकत थी। तुम अगर मुझ पर विश्वास रखती तो मैं इस सारे जमाने से भी लड़ सकता था।
'जान' मैंने तुमको सच्चे दिल से प्यार किया था कभी भी तुमको धोखा देने या झुठ बोलने की कोशिश नहीं की ऐसा मुझसे कभी हुआ ही नहीं। मुझे तुम पर हमेशा विश्वास रहा। पर तुमने ही मुझ पर से विश्वास उठा लिया। आज ही तुमसे फोन पर बात हुई, तुमको पता है मैं हमेशा तुम्हारे फोन का wait बेसर्बी से करता रहता हूं। आज तुमसे अपने एक सवाल का जवाब मांगा है। जो तुम मुझको सोमवार को बताआगी-

कि आखिर तुमने मेरा साथ क्यों छोड दिया?
क्यों हमारी शादी नहीं हो सकती?

और शायद मुझे तुम्हारा जवाब पता भी है। लेकिन मैं फिर भी तुम्हारे मुंह से सुनना चाहता हूं। और जैसा कि मैंने तुमको फोन पर भी बोला कि हम फ्रेण्डस थे, हैं और हमेशा रहेंगे। तुम मुझ पर हमेशा विश्वास रखना। मैंने तुमसे हमेशा प्यार किया है, करता हूं और जब तक जिंदा हूं करता रहूंगा। मैं तुम्हारा इंतजार मरते दम तक करूंगा, क्योंकि तुम्हारे अलावा इस दिल में अब और कोई नहीं आ सकता।

अंत में यही की 'जान' मुझे इस प्यार से दो ही चीजे मिली

- आंसू और
- दिल का दर्द...

जो मैं यहां बयां करता रहूंगा।

तुम्हारा प्यार