Wednesday, February 11, 2009

"कितनी जल्दी ये मुलाकात गुजर जाती है"


कितनी जल्दी ये मुलाकात गुजर जाती है

प्यास बूझती नहीं के बरसात गुजर जाती है

अपनी यादों से कह दो यूं याद ना करें

नींद आती नहीं और रात गुजर जाती है

3 comments:

निर्मला कपिला said...

vah vah kamaal kar dya bahut sunder hai bdhaai

मोहन वशिष्‍ठ said...

कितनी जल्दी ये मुलाकात गुजर जाती है
प्यास बूझती नहीं के बरसात गुजर जाती है
अपनी यादों से कह दो यूं याद ना करें
नींद आती नहीं और रात गुजर जाती है

वाह भाई वाह एक बेहतरीन रचना लिखी है आपने बहुत बहुत बधाई

दिगम्बर नासवा said...

बेहतरीन.........लाजवाब, खूबसूरत
एहसास से भरी, अच्छी रचना