Wednesday, March 4, 2009

"तुम याद आए..."


जब पत्तों की पाजेब बजी तुम याद आए,
जब सावन रूत की पवन चली तुम याद आए,


जब पंछी बोले घर के सूने आंगन में तुम याद आए,
जब अमृत की एक बूंद पड़ी तुम याद आए,


रूत आई पीले फूलों की तुम याद आए,
दिनभर दुनिया के झमेलों में खोया रहा मैं,


जब शाम को दिवारों से धूप ढ़ली तब तुम याद आए....

5 comments:

दिगम्बर नासवा said...

रूत आई पीले फूलों की तुम याद आए,

tum to dil mein rahte ho...........tumhaari yaad jaati hi nahi

मोहिन्दर कुमार said...

इक इक पल बीता यादों में
न जाने तुम कब कब याद आये...

यादों से लिपटी एक भावभीनी रचना के लिये बधाई..

Manoshi said...

गुलाम अली और आशा ने इस ग़्ज़ल को बहुत अच्छे से गाया है। औडियो भी लगा देते आप तो सोने पे सुहागा हो जाता।

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर ... तुम याद आए।

upasana said...

jabb bhi vo jagah dekti hu...jaha tum or main mila karte they...jab vo gana sunti hu jo tum gaya kartey they....tabb har pal ki tarah mujhe tum yaad aaye....hann mujhe tum yaad aaye