Thursday, March 12, 2009

"तुझे चाहते हैं"


तुम्हें चाहते हैं बेइंतहा पर चाहना नहीं आता,
ये कैसी मोहब्बत है कि हमें बयां करना नहीं आता,

जिंदगी में आ जाओं मेरी जिंदगी बनकर,
कि तेरे बिना हमें जिंदा रहना नहीं आता,

हर पल तुझे बस तुझे दुआओं में मांगते हैं,
मगर क्या करें कि हमें तुझे पाना नहीं आता।

2 comments:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

तुम्हें चाहते हैं बेइंतहा पर चाहना नहीं आता,
ये कैसी मोहब्बत है कि हमें बयां करना नहीं आता,

बहुत सुन्दर रचना है . बधाई .

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर ...