Saturday, March 7, 2009

"वो दिल ही क्या जो तेरे मिलने की दुआ ना करे..."


वो दिल ही क्या जो तेरे मिलने की दुआ ना करे,
मैं तुझ को भूल कर जिंदा रहूं खुदा ना करे,

रहेगा प्यार तेरे साथ जिंदगी बनकर,
ये ओर बात है मेरी जिंदगी वफा करे ना करे,

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में,
खुदा किसी को किसी से जुदा ना करे,

अगर वफा पे भरोसा ना रहे दुनिया को,
तो कोई शक्स मोहब्बत ही ना करे,

सुना है उसको मोहब्बत दुआए देती है,
जो दिल पे चोट खाए मगर गिला ना करे,

वो दिल ही क्या जो तेरे मिलने की दुआ ना करे...

2 comments:

दिगम्बर नासवा said...

ग़ज़ल तो अच्छी है , सुनी हुई है

mehek said...

सुना है उसको मोहब्बत दुआए देती है,
जो दिल पे चोट खाए मगर गिला ना करे,
bahut sundar